सिकरोदा तिराहा यानि ब्लैक स्पाट… लगातार लील रहा जिंदगियां, अफसर जिम्मेदार


ग्वालियर। सिकरोदा तिराहा पर लगातार हादसे होते हैं। हादसे भी ऐसे जिनके बारे में सुनकर ही रूह कांप जाती है। लगातार यह ब्लैक स्पाट वाहन चालकों की जिंदगियां लील रहा है, लेकिन यहां हादसे रोकने के लिए जो कवायद हकीकत में होनी चाहिए, वह सिर्फ प्लानिंग और कागजों तक ही सीमित है। इन हादसों को रोकने की सीधी जिम्मेदारी नेशनल हाइवे अथोरिटी आफ इंडिया के अफसरों की है। दर्जनों बार हादसे रोकने के लिए पुलिस से लेकर अलग-अलग विभागों के अफसरों का निरीक्षण हुआ, कई बार बैठक हुई, सुधार के लिए बिंदु भी तय हुए, लेकिन सिर्फ कागजों तक सीमित रहे। यही वजह है- यहां हादसे नहीं रुक रहे और लगातार दर्दनाक मौतें हो रही हैं।
जब कोई वाहन चालक ग्वालियर की ओर से सिकरोदा तिराहा जाता है और सड़क पार कर वाहन चालक को डबरा की ओर जाना होता है तो यहां से जा रहे वाहन चालक को डबरा की ओर से आ रहा वाहन नजर ही नहीं आता। इसी तरह डबरा की ओर से जो वाहन आते हैं या फिर निरावली की ओर से जो वाहन आते हैं उन्हें ग्वालियर की ओर से जा रहे वाहन नजर नहीं आते। इसका कारण है- सड़क की ऊंचाई हर तरफ से एक समान नहीं है। ऐसे में जब वाहन नजर नहीं आता तो सड़क पार करते समय अचानक वाहन आमने-सामने आ जाते हैं और यही हादसे की वजह बनती है।वाहन दोनों तरफ से तेज रफ्तार में निकलते हैं। निरावली बायपास और जौरासी की ओर से आ रहे वाहन तेज रफ्तार में ही चौराहे से क्रास करते हैं। पुलिस का इंटरसेप्टर भी कटघरे में है। झांसी हाइवे पर इंटरसेप्टपर व्हीकल तैनात है। इसकी जिम्मेदारी तेज रफ्तार में निकल रही गाड़ियों को रोककर कार्रवाई की है। जौरासी और सिकरोदा दोनों हादसों के प्वाइंट है, लेकिन इंटरसेप्टर व्हीकल बीच में खड़ा होता है। हमेशा झांसी की ओर जाने वाले रास्ते पर ही व्हीकल खड़ा रहता है। यह लोग चार पहिया वाहन को टारगेट करते हैं, लेकिन सबसे जयादा हादसे ट्रक, डंपर, बसों से हाेते हैं। इन पर कार्रवाई नहीं होती।