
ग्वालियर। केंद्र सरकार की मंशा के अनुरूप शहरों में हर घर से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन होना चाहिए, ताकि शहर में कहीं भी कचरे के ढेर नजर नहीं आएं, लेकिन अब भी यह काम पूरी तरह से नहीं हो रहा है। नगर निगम ने इसके लिए कागजी तैयारियां तो भरपूर कर रखी हैं, लेकिन मैदानी स्तर पर अमल नहीं हो पाता है। निगम ने घरों से कचरा कलेक्शन के लिए 66 वार्डों में 250 रूट तो तैयार किए हैं, लेकिन इन रूट पर वाहन नहीं दौड़ते हैं।
इनकी निगरानी के लिए जीपीएस की व्यवस्था भी दिखावा साबित हो रही है, क्योंकि जीपीएस में तमाम तरह की गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। वाहन चालक निगरानी से बचने के लिए जीपीएस को बंद कर देते हैं। दरअसल, नगर निगम ने डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए विधानसभावार क्षेत्रफल के हिसाब से हर वार्ड में दो से तीन टिपर वाहन लगा रखे हैं, लेकिन ये टिपर वाहन हर घर से कचरा नहीं लेते हैं। कई बार ऐसी गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं, जहां टिपर वाहन वार्ड में पूरे चक्कर ही नहीं लगाते हैं। एक टिपर वाहन को वार्ड में कम से कम तीन चक्कर लगाना जरूरी है, लेकिन वे सिर्फ दो ही चक्कर लगाते हैं। इससे हर घर तक पहुंच नहीं हो पाती है। दूसरी तरफ जीपीएस में रनिंग पूरी दिखाने के लिए वाहन चालक पूरी गाड़ी को भरे बिना ही कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर पहुंच जाते हैं। निगमायुक्त हर्ष सिंह के निरीक्षण के दौरान भी यह गड़बड़ियां पकड़ में आ चुकी हैं।
इसके अलावा प्रतिदिन जारी होने वाली जीपीएस रिपोर्ट में भी आधा सैकड़ा से अधिक वाहनतीन से कम चक्कर लगाते हुए दर्ज किए जाते हैं। यह गड़बड़ी पकड़ में आने के बावजूद अभी तक व्यवस्था में सुधार नहीं हो सका है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 में भी डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन भी 98 प्रतिशत पाया गया था, वो भी तब जब टीम आने पर सजगता थोड़ी बढ़ जाती है।
शहर में यदि पूरी तरह से डोर-टू-डोर कलेक्शन हो रहा होता, तो विभिन्न इलाकों में जगह-जगह कचरे के ढेर नजर नहीं आते। वर्तमान में शहर के कई इलाकों में कचरा ठिए नजर आते हैं। इनमें विनय नगर सेक्टर चार, आनंद नगर, हथियापौर गेट, सोना गार्डन, अनुपम नगर, महलगांव करौली माता मंदिर के पास, सेवा नगर, रसूलाबाद सहित कई इलाकों में कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं। शहरभर के चार विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे 100 से ज्यादा कचरा ठिए चिह्नित हैं। इनसे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि घरों से पूरी तरह से कचरा नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में डंपरों और जेसीबी के माध्यम से नगर निगम द्वारा ये ठिए हटाए जाते हैं।

