न्याय की नई नवेली बिल्डिंग से पहली बारिश में ही टपकने लगा पानी

ग्वालियर। जिला अदालत के नवीन भवन में कोर्ट शुरू हुए अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ था कि बरसात की बूंदों ने निर्माण की गुणवत्ता की कलई खुल गई। चंद दिनों में ही एक के बाद एक भवन की तमाम खामियां सामने आने लगीं।
साढे चार लाख वर्गफीट के क्षेत्र में लगभग डेढ़ दशक से अधिक समय का इंतजार और 115 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद तैयार हुए पांच मंजिला भवन में महीने भर में ही टूट-फूट की शिकायतें सामने आने लगी हैं। कहीं दीवारों में दरारें आना शुरू हो गईं तो कहीं पिलर में टूट-फूट हो रही है। रखरखाव में लापरवाही का परिणाम ऐसा है कि भवन के चौथे तल पर जल भराव हो रहा है। शौचालय से लेकर वाटर कूलर तक गंदगी और मिट्टी युक्त पानी जमा है।
हैरानी की बात यह भी है कि जो स्थान अभिभाषकों के बैठने के लिए तैयार किया गया है वहां भी बरसात में छत से पानी टपकता मिला है। जिस पीआईयू ने इसका निर्माण किया है उसके जिम्मेदार अधिकारी अपनी कमियों को स्वीकारने के तैयार नहीं हैं, वहीं बार एसोसिएशन में इतनी नाराजगी है कि वह संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के विरुद्घ मुकदमा तक दर्ज करवाने की मांग कर रहे हैं।
बीते शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायालय के नवीन भवन का प्रवेश द्वार क्रमांक 4 गिर गया। जिसे मंगलवार को जुडवाया गया है। उसके गिरने का कारण किसी वाहन से टकराना बताया जा रहा है हालांकि इस घटना का कोई प्रत्यक्ष दर्शी नहीं है। तीन से चार दिन तक टूटा पड़ा रहा दरवाजा जब जुडवाया भी गया तो साफ देखा जा सकता था कि महज औपचारिकता की गई है। न के बराबर सीमेंट का प्रयोग किया गया है और क्षतिग्रस्त हिस्से को सीमेंट से कवर भी नहीं किया गया है।