
चैत्र पूर्णिमा पर मंगलवार को मेष लग्न में अंजनी पुत्र हनुमानजी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। मंदिरों में सुबह भगवान का अभिषेक, पूजन कर विशेष श्रृंगार किया जाएगा। शाम को महाआरती व भंडारा महाप्रसादी के आयोजन हाेंगे। शहर के कुछ हनुमान मंदिरों में दो दिवसीय जन्म महोत्सव मनाया जा रहा है।
शिव महापुराण की मान्यता के अनुसार चैत्र मास की पूर्णिमा के दिन सूर्योदय के समय भगवान हनुमानजी का जन्म हुआ था। इस बार हनुमान जयंती मंगलवार के दिन आ रही है। सुबह सूर्योदय के समय मेष लग्न रहेगा। धर्मशास्त्र व ज्योतिष की मान्यता के अनुसार हनुमानजी का जन्म मंगलवार के दिन हुआ था। संयोग से इस बार हनुमान जयंती मंगवार के दिन ही आ रही है। वहीं जन्म के समय मेष लग्न भी विशेष है, क्योंकि मेष लग्न के स्वामी स्वयं मंगल हैं। ऐसे में इस बार हनुमान जयंती का पर्वकाल हनुमानजी की साधना आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जा रहा है। जिन जातकों की जन्म पत्रिका में मंगल की विपरीत स्थिति बन रही हो अथवा मंगल व शनि का युति दोष हो, तो उन्हें चैत्र पूर्णिमा पर हनुमानजी की विशेष साधना व उपासना करना चाहिए।
चैत्र पूर्णिमा पर मंगलवार को सुबह अपनी मनोकामना के अनुसार संकल्प लेकर हनुमानजी को चमेली के तेल व सिंदूर का चोला चढ़ाएं। इसके बाद भगवान का षोडशोपचार पूजन करें। भगवान को केले, अमरूद, आम, बेसन के लड्डू अथवा चूरमे का भोग लगाएं। पश्चात सुंदरकांड, हनुमान चालीसा, हनुमानअष्टक, बजरंग बाण आदि का पाठ कर आरती करें।
मंगलवार को मेष लग्न में मनेगा हनुमानजी का जन्मोत्सव

