भारतीय रेलवे ने मानसून सीजन को देखते हुए ग्वालियर-झांसी रेलखंड के 130 से अधिक पुलों की मरम्मत और रखरखाव का एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस पूरी परियोजना पर रेलवे करीब ₹2.90 करोड़ खर्च कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य भारी बारिश के दौरान रेल संचालन को सुरक्षित और बाधारहित (निर्बाध) बनाए रखना है।
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मरम्मत कार्य से जुड़े मुख्य बिंदु
- सूट का दायरा: यह काम लगभग 163 किलोमीटर लंबे ग्वालियर-झांसी रेलखंड पर किया जा रहा है।
- कुल बजट: इस व्यापक मरम्मत और सुरक्षात्मक पेंटिंग कार्य के लिए विशेष रूप से ₹2.90 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
- कार्यकारी प्राधिकरण: यह काम झांसी रेल मंडल के इंजीनियरिंग विभाग की देखरेख में किया जा रहा है।
- शामिल संरचनाएं: इसके तहत सिर्फ रेलवे ट्रैक के पुल ही नहीं, बल्कि फुट ओवरब्रिज (FOB), रोड ओवरब्रिज (ROB) और ट्रैक गर्डर ब्रिज भी दुरुस्त किए जाएंगे।
- विशेष एंटी-कोरोजन कोटिंग: लोहे के ढांचों को नमी और बारिश से बचाने के लिए पहले पुलों से जंग (Rust) हटाई जाएगी। इसके बाद उन पर उच्च गुणवत्ता वाली विशेष एंटी-कोरोजन सुरक्षात्मक पेंटिंग की जाएगी।
- समय सीमा: झांसी रेल मंडल के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट को 1 वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
- यातायात का दबाव: यह एक बेहद व्यस्त रूट है, जिससे रोज सैकड़ों मालगाड़ियां और हाई-स्पीड यात्री ट्रेनें (जैसे शताब्दी और वंदे भारत) गुजरती हैं। इसलिए इसकी सुरक्षा बेहद जरूरी है।
- शामिल संरचनाएं: इसके तहत केवल पटरियों के नीचे के पुल ही नहीं, बल्कि निम्नलिखित संरचनाओं की भी मरम्मत की जा रही है:
- नदियों और नहरों पर बने छोटे-बड़े रेलवे पुल।
- ट्रैक गर्डर स्ट्रक्चर (लोहे के भारी गर्डर)।
- यात्रियों के लिए बने फुट ओवरब्रिज (FOB)।
- रेलवे लाइन के ऊपर से गुजरने वाले रोड ओवरब्रिज (ROB)।
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तकनीकी मरम्मत की प्रक्रिया
बारिश, नमी और जलभराव से लोहे के पुलों को बचाने के लिए रेलवे का इंजीनियरिंग विभाग तीन चरणों वाली विशेष जंग-रोधी (Anti-Corrosion) तकनीक का उपयोग कर रहा है:
- जंग की सफाई: सबसे पहले पुलों के खुले हुए लोहे के हिस्सों से जमी हुई केमिकल जंग की परतों को हाई-प्रेशर मशीनों और सैंडब्लास्टिंग/मैनुअल तरीके से पूरी तरह साफ किया जा रहा है।
- एंटी-कोरोजन प्राइमिंग: सफाई के बाद, लोहे पर पानी और नमी का असर बेअसर करने के लिए एक विशेष इंडस्ट्री-ग्रेड एंटी-कोरोजन प्राइमर कोट लगाया जा रहा है।
- विशेष वेदरप्रूफ पेंटिंग: प्राइमर के ऊपर मौसम की मार झेलने वाले सुरक्षात्मक पेंट की भारी परत (टॉपकोट) लगाई जा रही है, जो पुलों की उम्र को कई दशक बढ़ा देती है।
- ढांचागत मजबूती: जहां भी लोहे के खंभों, गर्डरों या कंक्रीट के गारे में दरारें या कमजोरी पाई जा रही है, वहां स्पॉट-रिपेयरिंग और वेल्डिंग के जरिए उसे मजबूत किया जा रहा है।
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इस परियोजना के मुख्य उद्देश्य
- मानसून की तैयारी: भारी मानसूनी बारिश के दौरान पुलों की सुरक्षा से समझौता न हो और ट्रेन संचालन बिना किसी बाधा के चलता रहे।
- लागत की बचत: समय रहते छोटी मरम्मत (Preventative Maintenance) करने से भविष्य में होने वाले बड़े हादसों और पुलों को दोबारा बनाने में लगने वाले अरबों रुपयों के खर्च को टाला जा सकता है।
- ट्रेनों की रफ्तार: कमजोर पुलों के कारण ट्रेनों को धीमा करने के लिए ‘कॉशन ऑर्डर’ जारी करने पड़ते हैं। इस मरम्मत के बाद ट्रेनें अपनी पूरी तय गति से सुरक्षित गुजर सकेंगी।
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