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ग्वालियर| इंदौर जिले में साल 2023 में हुए बावड़ी हादसे से पूरा प्रदेश विचलित हो गया था. इस हादसे में 36 लोगों की मौतें हुई थी तब सरकार ने प्रदेश के हर जिले में पुरानी बावड़ी और कुओं के संधारण को लेकर सरकार सख्त हुई थी, लेकिन अतिक्रमण की चपेट में आई ग्वालियर की 3000 बावड़ियां एक बार फिर खतरनाक हादसे को दावत दे रही हैं. प्रशासन का दावा है कि वह सभी बावड़ियों को जल गंगा संवर्धन कार्यक्रम में शामिल कर उन्हें जिंदा करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कोशिश उतनी कामयाब होती नजर नही आ रही है.
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गौरतलब है ऐतिहासिक शहर ग्वालियर को कुओं और बावड़ियों का शहर कहा जाता था, यहां जिले में सबसे ज्यादा खतरनाक जर्जर कुएं-बावड़ियां हैं, जिनकी संख्या लगभग 3000 से ज्यादा है, क्योंकि ग्वालियर में रियासत काल के दौरान सबसे अधिक कुएं- बावड़ी बनाई गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की बीजेपी सरकार के आदेश के बाद इनके संधारण का काम चर्चित जल गंगा संवर्धन अभियान से जोड़ा गया है और इनकी साफ सफाई की जा रही है, लेकिन अभी भी कई ऐसे जल स्त्रोत है, जिन पर कब्जा हो गया है.
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प्रशासन का दावा हैं कि ग्वालियर शहर की 3000 से अधिक कुएं-बावड़ियों के जीर्णोद्धार के लिए नगर निगम बीते एक साल से काम कर रहा है. इस काम के लिए केंद्र से पहली किस्त के रूप में 25 लाख रुपए निगम को मिल चुका है, बावजूद इसके कब्जों को हटाया नहीं जा सका है. बीजेपी पार्षद कहते हैं कि निगम सिर्फ खाना पूर्ति करने में लगा हुआ है. ऐसे में देखा जाएं तो हर साल ग्वालियर में गर्मियों के मौसम में जल संकट हो पैदा हो जाता है. उल्लेखनीय है अभी भी शहर की 60 फीसदी आबादी को एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है, लेकिन सही तरीके से निगम ओर जिला प्रशासन रिसायत कालीन कुएं और बावड़ियों को अतिक्रमण मुक्त कराकर साफ सफाई करा देता है, तो शायद ग्वालियर में जल संकट काफी हद तक खत्म हो सकती है|
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