
– प्रवर्तन अमले की कमी बनी बाधा, संसाधन तक नहीं कराए जा सके हैं उपलब्ध
ग्वालियर । परिवहन विभाग के चेक पोस्ट जब संचालित थे तो एक तरह से विभाग पर भ्रष्टाचार का टैग लग गया था। इस टैग को मिटाने के लिए मुख्यमंत्री ने चेक पोस्ट बंद कराकर गुजरात मॉडल के तहत चेक पॉइंट शुरू करा दिए हैं, लेकिन साढ़े तीन माह बाद भी प्रदेश में चेक पॉइंट पूरी तरह से संचालित नहीं हो सके है। इसके चलते विभाग को राजस्व का खासा नुकसान तो हो ही रहा है, साथ ही ओवरलोड माल वाहक वाहन धड़ल्ले से दौड़ लगा रहे हैं, जिससे सड़कों का नुकसान होने के साथ ही दुर्घटना का भी अंदेशा बना रहता है।
प्रदेश में परिवहन विभाग में गुजरात मॉडल की व्यवस्था लागू करने से पहले प्रदेश से एक टीम को गुजरात भेजा गया था। उसके बाद उक्त टीम ने जो रिपोर्ट दी थी, उसमें साफ कहा गया था कि गुजरात में परिवहन विभाग के पास प्रवर्तन अमला पर्याप्त संख्या में होने के साथ ही पूरे संसाधन हैं और अगर उक्त व्यवस्था को प्रदेश में लागू किया जाए तो उसके पहले व्यवस्था पूरी करना जरूरी है, तभी यह मॉडल सफल हो सकेगा। रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया था, लेकिन जुलाई से अचानक चेक पोस्ट बंदकर गुजरात मॉडल के तहत व्यवस्था को लागू करने का आदेश जारी कर दिया गया। अब उस आदेश को निकले साढ़े तीन माह हो चुके हैं, लेकिन आदेश पर पूरी तरह से अमल नहीं हो सका है। मध्यप्रदेश में 45 चेक पॉइंट स्थापित कर वाहनों की चेकिंग करने का आदेश जारी किया गया, लेकिन तीन दिन पहले ही प्रदेश के परिवहन मंत्री राव उदयप्रताप सिंह ने कहा था कि फिलहाल सिर्फ 30 चेक पॉइंट ही शुरू हो सके हैं, लेकिन हकीकत इससे उलट है, क्योंकि रात के समय परिवहन विभाग का अमला सड़क पर चेक पॉइंट लगाने के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि वह अपनी सुरक्षा को लेकर खासे चितिंत हैं।
गुजरात मॉडल व्यवस्था लागू होने के बाद से विभाग में खामोशी छा गई है, क्योंकि चेक पॉइंट में शामिल होने के लिए अमला कट रहा है, उसके सामने अपनी सुरक्षा का सवाल खड़ा है। एक परिवहन निरीक्षक व्यवस्था के खिलाफ प्रवर्तन अमले को एकजुट करने में लगा है, क्योंकि विभाग में अमले के लोग खुलकर कुछ बोलने से बचते हैं, जिसके चलते उक्त निरीक्षक की शरण में पहुंच गए हैं ताकि उनकी मंशा से संबंधित निरीक्षक विभाग के आला अधिकारियों को अवगत करा सके। विभाग के अंदरखाने की मानें तो एक तरह से गुजरात मॉडल को फेल करने की साजिश की जा रही है। इसके पीछे तर्क है कि न तो इससे राजस्व में मुनाफा होने वाला है और न ही अमला सुरक्षित है।
गुजरात में तीन शिफ्टों में लगती है ड्यूटी
परिवहन विभाग गुजरात में तीन शिफ्टो में चेक पॉइंट पर ड्यूटी लगती है। साथ ही वहां बॉडी ब्रेन कैमरा के साथ ही अन्य संसाधन भी उनके पास उपलब्ध हैं। संसाधन होने के बाद भी वहां का अमला चेक पॉइंट शहर के आसपास ही लगाता है, क्योंकि उनका भी कहना है कि सुरक्षा की तो सबसे अधिक चिंता रहती है। इसके कारण ही शहर व पुलिस चौकी या थाने के पास ही पॉइंट लगाते हैं। वहीं प्रदेश में प्रवर्तन अमला पर्याप्त नहीं है। और जो था उसमें से भी 45 आरक्षक बाहर कर दिए हैं। इसके चलते तीन शिफ्टों में ड्यूटी लगाने के लिए पर्याप्त अमला न होने से एक तरह से गुजरात मॉडल की व्यवस्था साढे तीन माह में भी पटरी से दूरी बनाए हुए है।
परिवहन विभाग : साढ़े तीन माह बाद भी शुरू नहीं हुए चेक पॉइंट, राजस्व का हो रहा नुकसान

