स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के आडिट में फेल हो रहीं 108 एंबुलेंस

ग्वालियर। दिल का दौरा पड़ा हो या फिर सड़क हादसे के बाद ट्रामा वाली स्थिति में मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की जरूरत पड़ती है। इसे विशेषज्ञ गोल्डन आवर और अस्पताल पहुंचने तक एंबुलेंस में ही मरीजों को कई जीवन रक्षक उपकरण की सहायता को जरूरी बताते हैं। एंबुलेंस मरीज को अस्पताल पहुंचाने का साधन मात्र नहीं होती, बल्कि वह अस्पताल की भूमिका में भी तब तक होती है जब तक मरीज अस्पताल न पहुंच जाए। लेकिन यही 108 एंबुलेंस आडिट में फेल रही हैं।
पिछले माह 108 एंबुलेंस का आडिट मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के आदेश पर किया। इस आडिट में पांच एंबुलेंस में से तीन में न केवल कमियां मिलीं बल्कि पल्स आक्सीमीटर, नेबुलाइजर, अग्निशमन यंत्र तक एक्सपायर मिले। वहीं एंबुलेंस के रिस्पांस टाइम को लेकर हर रोज सवाल उठ रहे हैं। इस लापरवाही की वजह से मरीजों को जान तक गंवाना पड़ रही हैं। बावजूद इसके 108 एंबुलेंस का संचालन करने वाली कंपनी रिस्पांस टाइम को लेकर लापरवाह बनी हुई है। इसके लिए जिम्मेदारों को समय-समय पर आडिट करना होगा जिससे व्यवस्था सुधर सके।