हर तिराहे और चौराहे पर जीत-हार के चर्चे


ग्वालियर| लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत को देखकर हर और जीत का कयास लगाना मुश्किल हो रहा है। कोई भी ताल ठोककर यह नहीं बोल पा रहा है कि फूल खिलेगा या फिर पंजा। लेकिन फिर भी हर और जीत की चर्चाओं का बाजार गर्म है। जिस तरह से तापमान बढ़ा तो चर्चाओं के बाजार में भी गर्मी आ गई। चाय की गुमटी से लेकर तिराहे और चौराहा पर लगी पान की गुमटियों तक पर एक ही चर्चा है कि इस बार जीतेगा कौन, क्योंकि 40 साल बाद मतदान का प्रतिशत इतना अधिक पहुंचा है।
कोई राम मंदिर बनने के बाद मतदाताओं में आया जोश बता रहा है तो किसी ने पढ़े लिखे प्रत्याशी को चुनने की बात कही। लेकिन जीत का ताज किसके सिर माथे होगा इसका फैसला तो चार जून को ही होगा। तब तक तो अटकलों का बाजार ही गर्म रहने वाला है, लेकिन लोग अपने अपने गणित से अपने चहेते दल व प्रत्याशी की जीत सुनश्चित कर रहा है। आमजन भले ही यह बताने का सामर्थ्य नहीं जता पा रहा है कि उसने वोट किसे दिया। लेकिन बढ़े हुए मतदान प्रतिशत से कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ता खुश हैं। वे मानकर चल रहे हैं कि जीत उनकी है। लेकिन एक दूसरा धड़ा भी है जो इन दलों के नाराज कार्यकर्ताओं का है वह विपक्ष के प्रत्याशी की जीत पर दांव लगा रहे हैं। कांग्रेस से नाराज कार्यकर्ता राम मंदिर का मुद्दे पर बीजेपी की जीत तय कर रहे हैं तो वहीं बीजेपी से नाराज कार्यकर्ता कांग्रेस के पढ़े लिखे प्रत्याशी को ही जीता बता रहे हैं। सट्टा बाजार में बीजेपी का भाव ज्यादा मिल रहा है। सटोरियों का कहना है कि कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला कांटे का रहा है, क्योंकि दोनों ही तरफ से मतदान जमकर हुआ है।
शहर के तिराहे चौराहे से लेकर घर की बैठक में चुनावी चर्चा ही चल रही है। हर व्यक्ति अपना अपना गणित बताकर फूल और पंजे की जीत को सुनश्चित कर रहा है, लेकिन मतदाता की चुप्पी चार जून को चौंका सकती है। देखा जा रहा है जो लोग डायलोग मार रहे है कि जो राम का नहीं वो काम का नहीं, उनमें से काफी सारे लोग दूसरे दल का बटन दबाकर आए हैं जबकि जो हाथ का पंजा दिखा रहे थे वह राम के नाम पर फूल खिलाकर आए हैं। इसलिए मतदाता ने इस बार चुप्पी साध रखी है क्योंकि उसे भी नतीजे का इंतजार है।