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ग्वालियर। बीते दिनों आयोजित हुये श्री सनातन धर्म मंडल के स्थापना दिवस कार्यक्रम में प्रसादी कम पड़ने की चर्चा ने जोर पकड़े रखा। इससे कई लोगों को पंगत से भूखे तक लौटने की नौबत आई। वहीं स्थापना दिवस के अगले दिन सदस्यों को बंटे छप्पन भोग की प्रसादी के डिब्बे भी दो प्रकार के होने की बात सामने आई है। इससे मंडल के पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।
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यहां बता दे कि श्री सनातन धर्म मंदिर भक्तों की अगाध आस्था का केन्द्र है। यहां मंदिर के संचालन के लिये श्री सनातन धर्म मंडल काम करता है। इसमे बैठे पदाधिकारी खुद को धर्म का ठेकेदार मानकर चल रहे है और अपनी ढपनी अपना राग अलापते है। वैसे ही धर्म के नाम पर काला पीले करने वाले इन पदाधिकारियों का अब नया कारनामा सामने आया है। हाल ही में श्री सनातन धर्म मंदिर का स्थापना दिवस मनाया गया था। इस स्थापना दिवस में भोजन प्रसादी के लिये सदस्यों को कूपन भेजे गये थे। इस कूपन की विशेष बात यह रही थी कि इस कूपन पर लिखा था कि यह सिर्फ सदस्य के लिये है। मजे की बात यह है कि पदाधिकारियों का काम कूपन भेजने का है। अब सदस्य प्रसादी के लिये किसे कूपन लेकर भेजता है यह उस पर निर्भर करता है। परंतु कूंठा से ग्रस्त पदाधिकारी कुछ भी करने को उतारू है। वहीं जब सदस्य प्रसादी ग्रहण करने जाते है वहां भोजन प्रसादी की कमी पाई गई। किसी को आलू की सब्जी मिली तो किसी को नहीं। ऐसे ही मैथी दाना एक बार परोसा गया दूसरी बार मांगने पर भी नहीं मिला। प्रसादी वितरण का कुछ ऐसा ही हाल रहा। वहीं अब नई बात यह सामने आई है कि स्थापना दिवस के दूसरे दिन बंटे छप्पन भोग प्रसादी के डिब्बे दो तरह के होने सामने आये है। इसमे छोटे और बड़े का भेद रहा। हालांकि ऐसा भेद क्यों किया गया यह मंडल के पदाधिकारी ही बता सकते है।
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