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– अस्पताल के बाहर पार्टनर मेडीकल बनाकर लूटते हैं ग्राहकों को
– खास ब्राण्ड की दवा ही लिखते है जो वही पर मिलती है
ग्वालियर। ग्वालियर में प्राइवेट डाक्टर मरीज को चारों तरफ से लूट रहे है। एक जांच, दूसरा दवाओं, तीसरा भर्ती और चैथा परामर्श शुल्क के नाम पर। जिसमे सबसा बड़ा गौरखधंधा दवाओं को लेकर है। डाक्टर मरीज को खास ब्राण्ड की दवा लिखते है, जो अस्पताल या उनके क्लिनिक पर ही मिलती है, जो उंचे दामों पर मिलती है। इस दवा बिक्री में चिकित्सक का कमीशन और एमआर द्वारा दिये जाने वाले महंगे तोहफे और लुभावने लालच भी शामिल हैं। डाक्टर तो अपनी जेबें भर रहे है, लेकिन बेचारा मरीज खुद को ठगा महसूस करता है।
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चिकित्सकों और मेडिकल स्टोर्स के बीच का यह नेक्सस (सांठगांठ) एक पुरानी लेकिन गंभीर समस्या है। इसमें मरीजों को बेहतर इलाज के बजाय व्यावसायिक लाभ का जरिया बनाया जाता है। सांठगांठ की कार्यप्रणाली पर्चें पर कोड और खास ब्रांड की दवा रहती है। डॉक्टर अक्सर ऐसी ब्रांडेड दवाएं लिखते हैं जो केवल अस्पताल के ठीक बाहर स्थित पार्टनर मेडिकल स्टोर पर ही उपलब्ध होती हैं। अन्य दुकानों पर वह दवा नहीं मिलती, जिससे मरीज को वहीं से महंगी दवा खरीदने पर मजबूर होना पड़ता है। निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब्स से डॉक्टरों को भारी कमीशन मिलता है। कई बार अस्पताल के बिल में 45 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल दवाओं और उपभोग्य वस्तुओं का होता है, जिस पर अस्पताल भारी मार्जिन कमाते हैं। सरकारी और बड़े निजी अस्पतालों में दलाल सक्रिय रहते हैं जो मरीजों को गुमराह कर निजी क्लीनिकों या विशेष डायग्नोस्टिक सेंटरों पर भेजते हैं, जिसके लिए उन्हें प्रति मरीज 5,000 से 10,000 रुपये तक का कमीशन मिलता है।
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ग्वालियर में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इस तरह के गोरखधंधे के खिलाफ कई कदम भी उठाए हैं। अगस्त 2025 में ग्वालियर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने शहर में एक बड़ा अभियान चलाकर 15 फर्जी क्लीनिकों को सील किया था। इनमें से कई बिना पंजीकरण के चल रहे थे और 12वीं पास लोग डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहे थे। जनवरी 2026 में ग्वालियर आयुष विभाग ने थोक बाजार में छापा मारकर 300 जार नकली बॉडी ग्रोथ पाउडर जब्त किए थे। लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के कारण प्रशासन ने समय-समय पर निजी अस्पतालों के लाइसेंस रद्द किए हैं। एक बुद्धिजीवी के अनुसार यदि कोई डॉक्टर या अस्पताल बाहर से दवा लेने का विकल्प नहीं देता, तो आप सीएमएचओ कार्यालय या मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (181) पर शिकायत कर सकते हैं। उपभोक्ता फोरम ने ग्वालियर के अस्पतालों पर लापरवाही और लूट के लिए 8 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया है।
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