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– क्या अधिकारियों और निजी विज्ञापन एजेंसी में मिलीभगत?
ग्वालियर। शहर में लगे होर्डिंग और विज्ञापन को लेकर नगर निगम में गंभीर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के कई मामले सामने आए है। लेकिन नगर निगम के अधिकारी आज भी अपनी ढपली अपना राग अलापते है। जबकि शहर में अवैध रूप से लगे होर्डिंग्स और अतिक्रमण को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है।
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यहां बता दें कि होर्डिंग को लेकर ही आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने नवंबर 2025 में नगर निगम के चार अधिकारियों और एक निजी विज्ञापन एजेंसी के खिलाफ 54 लाख के घोटाले के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। यह मामला 2017 से 2021 के बीच सार्वजनिक शौचालयों पर विज्ञापन के टेंडर जारी करने में हुई भारी अनियमितताओं से जुड़ा है। नगर निगम परिषद की बैठकों में विपक्ष के पार्षदों ने शहर में लगे अवैध होर्डिंग्स को लेकर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। फरवरी 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, होर्डिंग शाखा में पर्याप्त स्टाफ होने के बावजूद अवैध होर्डिंग्स का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। जबकि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अवैध होर्डिंग्स के मामले में नगर निगम द्वारा पेश की गई रिपोर्ट पर नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने निगम पर तथ्यों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए एक विस्तृत फिजिकल सर्वे रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अधिकारियों की लापरवाही शहरों को डिजास्टर जोन बना रही है। होर्डिंग विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जांच के लिए पार्षदों की एक समिति भी बनाई गई थी। नगर निगम द्वारा अवैध होर्डिंग्स पर की गई कार्रवाई की जो रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई, उस पर कोर्ट ने भारी नाराजगी जताई और उसे भ्रामक बताया।
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वहीं नगर निगम की बैठकों में पार्षदों ने होर्डिंग शाखा में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। पार्षदों की जांच समिति ने पाया कि शहर में सैकड़ों अवैध होर्डिंग्स लगे हैं जिनसे निगम को एक रुपया भी राजस्व नहीं मिल रहा है, जबकि विज्ञापन एजेंसियां इनसे मोटी कमाई कर रही हैं। होर्डिंग और विज्ञापन जैसे प्रमुख राजस्व स्रोतों में हो रहे इन घोटालों के कारण ग्वालियर नगर निगम वर्तमान में आर्थिक संकट से गुजर रहा है। भ्रष्टाचार के चलते निगम कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन में देरी की खबरें भी सामने आई हैं। वहीं भुगतान न होने के कारण कई ठेकेदारों ने शहर में विकास कार्य रोक दिए हैं, जिसका सीधा असर शहर की सफाई और बुनियादी ढांचे पर पड़ रहा है।
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