शहर में बढ़ रही डॉग बाइट की घटनायें, हर दिन बड़ी संख्या में लोग इंजेक्शन के लिए पहुंच रहे अस्पताल

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– हाईकोर्ट ने राज्य शासन व नगर निगम से जवाब मांगा
ग्वालियर। शहर में डाग बाइट की घटनायें घटने की बजाय बढ़ रही है। हर दिन बड़ी संख्या में कुत्ते आमजनों को अपना शिकार बना रहे है। कुत्तों के काटने के मामले में वृद्धि होने से चिंता का माहौल है। सड़कों पर खुले में दिनभर कुत्ते बड़ी तादाद में घूम रहे है। वहीं निगम का अमला ऐसे आवारा कुत्तों को पकड़ने कहीं दिखाई ही नहीं देता है। नसबंदी का काम भी संभवतः ना के बराबर है जिससे दिन प्रतिदिन कुत्तों की जनसंख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में अब हाईकोर्ट की युगल पीठ ने शहर में बढ़ रही डॉग बाइट की घटनाओं पर राज्य शासन व नगर निगम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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हाईकोर्ट ने पूछा है कि सभी ऐसा हल बताएं, जिससे कुत्तों की आबादी व काटने की घटनाएं कम हो जाएं। वकीलों से भी कोर्ट ने सुझाव मांगे है। याचिकाकर्ताओं चंद्रप्रकाश जैन व अखिलेश केशरवानी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजा शर्मा ने तर्क दिया कि शहर में डॉग बाइट की घटनाएं बढ़ रही हैं। हर उम्र का व्यक्ति कुत्तों की वजह से प्रभावित हुआ है। इनकी आबादी भी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन नगर निगम व राज्य शासन इस समस्या का समाधान नहीं निकाल पा रह है। एक बच्चे के चेहरे को कुत्ते ने बुरी तरह काट दिया। उसके चेहरे पर काफी घाव हुआ। हर दिन बड़ी संख्या में लोग इंजेक्शन के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉग बाइट के शिकार लोगों का इलाज फ्री किया जाए और क्षतिपूर्ति भी दी जाए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता से सवाल किया कि क्या आपको भी कभी कुत्ते ने काटा है। उन्होंने जवाब दिया कि नहीं। विश्वविद्यालय परिसर का हवाला देते हुए कहा कि जीवाजी विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी को कुत्ते ने काट लिया, लेकिन वहां से कुत्ते नहीं भगाए गए। विश्वविद्यालय परिसर में बच्चे, महिला, बुजुर्ग घूमने जाते हैं। एक तरफ बच्चे खेल रहे हैं और दूसरी तरफ कुत्ते खड़े हैं। यहां भी घटना हो सकती है।

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वहीं झारखंड व उत्तराखंड सरकार ने क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। यदि किसी को कुत्ता काटता है तो दोनों राज्यों में क्षतिपूर्ति दी जाती है। सरकार व नगर निगम मिलकर क्षतिपूर्ति की राशि का भुगतान करती है। मध्यप्रदेश में भी क्षतिपूर्ति का प्रावधान होना चाहिए। कुत्ता के काटने पर लोगों का इलाज फ्री होना चाहिए। जेएएच में इंजेक्शन निरूशुल्क लगाया जाना चाहिए। कुत्तों को पकडकर शहर के बाहर भेजा जाना चाहिए। नसबंदी से जनसंख्या नहीं रुक रही है। इसलिए दूसरा विकल्प तलाशना चाहिए।

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