
ग्वालियर। मुरार स्थित सीपी कालोनी में सरकारी सड़क की जमीन पर नगर निगम की ओर से व्यवसायिक निर्माण अनुमति देने की शिकायत सामने आई है। इस मामले में शिकायतकर्ता ने नगरीय प्रशासन के प्रमुख सचिव, लोकायुक्त,संभागायुक्त, कलेक्टर व नगर निगम कमिश्नर को शिकायत की है।
शिकायत में बताया गया है कि नगर निगम के वार्ड क्रं 25 सीपी कालोनी मुरार में तत्कालीन भवन अधिकारी व जोनल अधिकारी जोन-8 द्वारा अशोक सिंह गुर्जर को कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर सांठगांठ करके अनुमति प्रदान कर दी। इसी मामले में पहले निर्माण अनुमति निरस्त की जा चुकी है और फिर दोबारा दे दी गई। शिकायत में अधिकारियों के निलंबन की मांग भी की गई है। कनिष्ठ शंकर अष्ठाना सहित क्षेत्र के लोगों ने शिकायत की है कि आदतन अपराधी अशोक गुर्जर द्वारा नौ जनवरी 2023 की रजिस्ट्री के आधार पर वाणिज्यक भवन निर्माण अनुमति 20 जून 2024 को प्राप्त कर ली। इससे पहले यही अनुमति निरस्त हो गई थी। परन्तु कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अशोक गुर्जर द्वारा पुनः नगर निगम में आवेदन प्रस्तुत कर मात्र एक पत्र के आधार पर नगर निगम के बिल्डिंग आफिसर द्वारा भवन निर्माण की अनुमति प्रदान की गई है। अनुमति प्रदान करने के दौरान भवन अधिकारी पवन शर्मा थे और जोनल अधिकारी अजय शर्मा,जिनके द्वारा यह अनुमति दी गई।
भवन अधिकरी ग्वालियर पूर्व एवं जेडओ जोन-8 द्वारा बिना संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश की अनुमति के बगैर किस आधार पर वाणिज्यक अनुमति प्रदान की गई। अशोक गुर्जर पुत्र श्री नन्हें सिंह गुर्जर द्वारा पुनः द्वितीय बार प्रस्तुत किए गए भवन निर्माण अनुमति आवेदन फाईल में नगर निगम के अधिकारियों द्वारा स्थल सत्यापन के समय सर्वे क्र 1191 के छायाचित्र संलग्न किए है जो कि राजस्व अभिलेख खसरा में शासकीय सड़क के रूप में आजादी से लेकर वर्तमान तक शासकीय सड़क के रूप में ही दर्ज है। शासकीय सडक सर्वे क्रं 1191 की भूमि जिसकी चौड़ाई राजस्व अभिलेख अक्स अनुसार लगभग 70 से 80 फीट है। उक्त सड़क की भूमि पर हो रहे अवैध निर्माण कार्य को नगर निगम के अधिकारियों द्वारा क्यों नहीं रोका जा रहा है जबकि उक्त सडक की भूमि का लगभग 3 हजार वर्गफुट पर 10 फीट गहरा तलघर खोद कर अवैध निर्माण किया जा रहा है।सर्वे क्रं 1200 की भूमि पर भवन निर्माण की अनुमति नगर निगम के अधिकारियों से सांठगांठ कर ली गई है और निर्माण सर्वे क्र 1191 शासकीय सड़क की भूमि पर किया जा रहा है। इसके बावजूद भी नगर निगम के अधिकारियों द्वारा अतिक्रमणकर्ताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

