भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने पीछे किये कदम, हिंदू संगठनों के निशाने पर आये सिंधिया


ग्वालियर। 14 वर्ष के अंतराल के बाद अंतरर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच होने से आइपीएल सहित अन्य मैच मिलने के लिए द्वार खुले हैं। जो कि अंचल के विकास का मूल आधार बनेगा, यह बात इस मैच का विरोध कर रहे संगठन भी नकार नहीं सकते हैं। बस बांग्लादेश में निर्मित हुए हालातों के बावजूद इस मैच के होने से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया हिंदू संगठनों के निशाने पर आ गये हैं। मैच का विरोध शुरु होते ही मुख्यमंत्री डा मोहन यादव सहित भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने मैच से किनारा कर लिया। इसके कारण भी विरोधियों को महल के विरोध में एक विमर्श बनाने का मौका मिल गया है। हिंदू संगठनों की आलोचना का केंद्र महल बना हुआ है। जबकि धर्मशाला का मैच निरस्त होने पर यह मैच बीसीसीआई के रोटेशन से मिला है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मैच के राजनीतिक रूप से दूरगामी परिणाम सामने आयेंगे।
नगर में केवल हिंदू महासभा बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को आधार बनाकर मैच का विरोध कर रही थी, अन्य हिंदू संगठन चुप्पी साधे हुए थे। मैच से दो दिन पहले बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक नीरज दौनेरिया ने मैच का विरोध कर हिंदू संगठनों को एक नई दिशा दे दी। आरएसएस की प्रबोधिनी व्याख्यान माला में समाजसेवी काजल हिंदूस्तीनी ने भी सार्वजनिक रूप से मैच का विरोध किया और इससे हिंदू संगठनों को संबल मिल गया। मुख्यमंत्री डा मोहन यादव, विधानसभाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर व नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का मैच में आना तय माना जा रहा था। लेकिन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के नहीं आने से विरोधियों को बल मिल गया। यही कारण रहा कि सांसद भारत सिंह कुशवाह, भाजपा जिलाध्यक्ष अभय चौधरी, पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर सहित अन्य प्रमुख नेता भी मैच में नजर नहीं आये। अंचल में भाजपा में दो खेमे हैं। दूसरा खेमा केंद्रीय मंत्री सिंधिया को लेकर शुरु से ही बैचेन रहता है। यह खेमा नहीं चाहता है कि सिंधिया समूचे ग्वालियर-चंबल में सक्रिय रहें। इस खेमे को अब महल पर हमला बोलने का मौका मिल गया है। अब फेसबुक व इस्टाग्राम सहित इंटरनेट मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर सिंधिया को निशाना कर मैसेज डाले जा रहे हैं। इन संदेशों पर कमेंट्स भी उसी तरीके के आ रहे हैं।