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मुरैना से राजस्थान के करौली जिले को सीधे जोड़ने वाला चंबल नदी पर सेवरघाट पुल बनकर तैयार है। इस पुल से मुरैना जिले जौरा-कैलारस से राजस्थान के करौली की दूरी 160 से घटकर 80 किलोमीटर रह जााएगी। नवरात्र में बड़ी संख्या में लोग मध्य प्रदेश के इस हिस्से से करौली में कैला देवी के दर्शनों के लिए जाते हैं। पत्थर कराबारियों को भी बड़ा फायदा होगा। पुल निर्माण के लिए राजस्थान सरकार ने साल 2020 में स्वीकृति दी थी। 720 मीटर लंबे और 10 मीटर चौड़ा यह पुल 13 पिलरों पर खड़ा हो चुका है। पुल का निर्माण पूरा हुए पांच महीने से ज्यादा समय हो गया, लेकिन इससे आवागमन शुरू नहीं हो पा रहा।
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बता दें कि वर्तमान में जौरा से करौली जाने के लिए मुरैना, धौलपुर, बाड़ी, सरमथुरा होते हुए लगभग 160 किमी की दूरी तय करना होती है। कैलारस के कई गांवों के लोग सेवर घाट से राजस्थान में पहुंचने के लिए चंबल पार करने के लिए नाव का सहारा लेते हैं।सेवरघाट पुल प्रभारी संतोष वर्मा का कहना है कि अब सिर्फ राजस्थान क्षेत्र में एप्रोच रोड का कुछ निर्माण होना है। एक महीने में पुल को आवागमन के लिए शुरू कर दिया जाएगा। इससे न सिर्फ लोगों का समय बचेगा बल्कि ईंधन की भी बड़ी बचत होगी। स्थानीय व्यापारियों, किसानों और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा।
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खास बात यह है कि इस रास्ते से कैला देवी मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा भी काफी आसान और तेज हो जाएगी, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रशासन के अनुसार पुल का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और फिलहाल एप्रोच रोड का काम अंतिम चरण में है। जैसे ही यह कार्य पूरा होगा, पुल को आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। यह पुल मुरैना और करौली के बीच व्यापार, पर्यटन और आवागमन को नई गति देने वाला अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जा रहा है।
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