भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। आज रुपया 88 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ 95.20 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह पहली बार है जब रुपया 95 के पार पहुंचा है।
पिछले एक महीने में ही रुपया करीब 4% कमजोर हुआ है, जबकि पूरे वित्त वर्ष में इसकी गिरावट 10% से ज्यादा दर्ज की गई है। इस गिरावट का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी अब मोबाइल लैपटॉप सोना खरीदना महंगा हो जाएगा। रुपए में आई इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं, लेकिन सबसे अहम वजह अंतरराष्ट्रीय हालात माने जा रहे हैं। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजराइल व ईरान के बीच चल रहे टकराव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। भारत अपनी जरूरत का करीब 85% तेल आयात करता है, जिसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया दबाव में आ गया।
ग्लोबल अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से दूरी बना ली है। मार्च महीने में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) ने करीब 12.3 अरब डॉलर (लगभग 1.15 लाख करोड़ रुपये) निकाल लिए हैं। निवेशक अब सुरक्षित विकल्पों जैसे अमेरिकी बॉन्ड्स की ओर रुख कर रहे हैं। इससे भारतीय बाजार में डॉलर की मांग और बढ़ी, जिसने रुपए की कमजोरी को और गहरा कर दिया। रुपए की गिरावट का असर अब सीधे आम लोगों की जिंदगी पर दिखेग| मध्य प्रदेश में भी अब मोबाइल, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे होंगे,पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, सोना-चांदी की कीमतों में उछाल आएगा,विदेश में पढ़ाई और यात्रा करना महंगा होगा,विदेशी सामान खरीदना जेब पर भारी पड़ेगा।
अगर वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है। ऐसे में आम लोगों को अपने खर्चों की योजना सोच-समझकर बनानी होगी।कुल मिलाकर, रुपया का यह ऐतिहासिक कमजोर स्तर सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि आम आदमी के बजट पर पड़ने वाला बड़ा असर है, जिसकी गूंज आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।
रुपया बिल्कुल ठीक चल रहा है: सीतारमण
लोकसभा में विपक्षी सदस्यों द्वारा रुपये की गिरावट का मुद्दा उठाए जाने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत की आर्थिक बुनियाद अभी भी मजबूत है. वित्त मंत्री ने कहा, ‘भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है, हमारी वित्तीय स्थिति मजबूत है और पूरी दुनिया हमारे राजकोषीय घाटे के प्रबंधन की सराहना कर रही है. हमारे विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत हैं.’ उन्होंने आगे कहा, ‘अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में रुपया ठीक चल रहा है, बिल्कुल ठीक चल रहा है.’

