अहोई अष्टमी गुरुवार को, अहोई माता के व्रत से होती है संतानों की उम्र लंबी

ग्वालियर। अहोई अष्टमी का व्रत संतान की दीर्घायु और उनके सुख संपन्न्ता के लिए 24 अक्तूबर गुरुवार को माताएं रखेगी। अहोई अष्टमी के पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है और शाम के वक्त स्याऊं माता की पूजा करने और कथा करने के बाद तारों को अर्घ्य देने के साथ ही व्रत का पारण किया जाता है। इस दिन साध्य योग और गुरु पुष्य नक्षत्र का निर्माण हो रहा है।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि जिन महिलाओं को संतान प्राप्ति में समस्याएं आ रही हैं उन्हें अहोई अष्टमी की पूजा व व्रत अवश्य करना चाहिए।क्योंकि इस व्रत के प्रभाव से संतान संबंधी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। स्याऊंमाता बच्चों का भाग्य बनाती हैं और उनको हर बुरी नजर से बचाती हैं। इस व्रत को करने से आपके घर में सुख समृद्धि बढ़ती हैं और आपके घर में बच्चों का करिअर बनता है। अहोई अष्टमी का व्रत माताएं कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि को रखती हैं और इस साल यह तिथि 24 अक्टूबर को सुबह एक बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और 25 अक्टूबर को सुबह एक बजकर 58 मिनट पर खत्म होगी। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत 24 अक्टूबर को रखा जाएगा।अहोई अष्टमी पर तारों को देखकर अर्घ्य देने का समय शाम को छह बजकर छह मिनिट से है।
इस दिन सूर्यास्त पांच बजकर 42 मिनट पर होगा। माताएं अहोई अष्टमी पर तारों को जल चढ़ाने के बाद पूजा करती हैं और उसके गुड़ के बने पुए से चंद्रमा का भोग लगाकर स्वयं भी उसी से व्रत खोलती हैं और बच्चों को भी वह पुए प्रसाद के रूप में देती हैं।