अभयारण्य में वर्षों से सोनचिरैया नजर नहीं आई, अब सफारी की तैयारी

ग्वालियर। घाटीगांव स्थित अभयारण्य में भले ही वर्षों से सोनचिरैया नजर नहीं आई है, लेकिन अब इसे फिर से गुलजार करने की तैयारी की जा रही है। प्रदेशभर में सिर्फ इसी अभयारण्य में सोनचिरैया देखने को मिलती थी, लेकिन एक दशक से इसे नहीं देखा गया है। हालांकि इस वन क्षेत्र में हिरण, चीतल, नील गाय से लेकर तेंदुआ तक देखने को मिलता है। ऐसे में अब इस अभयारण्य में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इसे सफारी का रूप देने की तैयारी की जा रही है। प्रदेश के पांच अभयारण्यों के जोनल मास्टर प्लान में इसे भी शामिल किया गया है।
प्राथमिक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार इस मास्टर प्लान में 28 गांवों और ग्रामीण क्षेत्र के चार वार्डों को शामिल किया जाएगा। पूर्व में इस अभयारण्य का कुल नोटिफाइड एरिया 512 वर्ग किमी था और इस अभयारण्य के क्षेत्र में आने वाले कई गांवों में ग्रामीणों की निजी जमीन की खरीद और बिक्री के अधिकार भी उनके पास नहीं थे। ऐसे में अभयारण्य के एरिया को डी-नोटिफाई किया गया। अब इस अभयारण्य का कुल 398.92 वर्ग किमी है, जिसमें से 127.77 वर्ग किमी का मास्टर प्लान तैयार कर वहां पर्यटकों के लिए सुविधाएं मुहैया कराने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने सांई कंसल्टिंग इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड को अधिकृत किया है। इस कंपनी ने क्षेत्र में सर्वे भी शुरू कर दिया है।
सोनचिरैया अभयारण्य का क्षेत्र पहले ग्वालियर के घाटीगांव के साथ ही शिवपुरी जिले के करैरा और मुरैना के जौरा तक लगता था, लेकिन ज्यादातर पर्यटक ग्वालियर और शिवपुरी से ही अभयारण्य में जाते थे। इस अभयारण्य को वर्ष 1981 में बनाया गया था और शिवपुरी में 1982 में पहली बार सोनचिरैया देखी गई थी। आखिरी बार 1993 में यहां यह पक्षी देखा गया। ग्वालियर के क्षेत्र में वर्ष 2008 में घायल अवस्था में एक सोनचिरैया मिली थी। उसके बाद वर्ष 2011 में आखिरी बार यहां सोनचिरैया को देखा गया। तब से लेकर अब तक यहां सोनचिरैया का नामोनिशान नहीं है।
सोनचिरैया को प्रकृति संरक्षण की अंतर्राष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल यूनियन फार कंजर्वेशन आफ नेचर (आइयूसीएन) ने विलुप्तप्राय प्राणियों की लाल सूची में रखा है। वर्तमान में राजस्थान के जैसलमेर और कोटा में सोनचिरैया का संरक्षण किया जा रहा है।ऐसे में राज्य सरकार द्वारा अधिकृत की गई सांई कंसल्टिंग कंपनी ने राजस्थान से अंडे लाकर इस पक्षी को पुनर्जीवित करने का प्लान तैयार किया है। हालांकि पूर्व में भी राजस्थान सरकार ने ऐसे प्रयासों पर पानी फेर दिया था। पिछले दिनों कंपनी के प्रतिनिधि ने संभागीय आयुक्त मनोज खत्री और निगमायुक्त अमन वैष्णव को इसका प्रेजेंटेशन भी दिया था।