गोल्डन टॉवर: बिल्डर पर FIR की मांग, दो पिलर और चटके, लोग बोले-दहशत में नहीं रहेंगे


ग्वालियर के थाटीपुर में दस दिन पहले (16 जुलाई) को गोल्डन टॉवर (पांच मंजिला मल्टी) का पिलर ध्वस्त होने से बिल्डिंग एक तरफ झुक गई। जिससे कई फ्लैटों में दरार आ गई। आधी रात प्रशासन ने रेस्क्यू कर पूरे 27 फ्लैट खाली कराए थे। मल्टी पर चेतावनी लगा दी-यह रहने योग्य नहीं है। 10 दिन हो गए हैं उसके बाद भी बिल्डिंग के संबंध में कोई एक्शन नहीं लिया गया है। बिल्डर मोहन बांदिल एक बार भी पीड़ित रहवासियों से नहीं मिला है। हालत यह है कि 10 दिन से यहां रहने वाले अपने दोस्तों, रिश्तेदारों व होटल में रुकने पर विवश है।
बिल्डिंग में रहने वालों ने नगर निगम के अधिकारियों से मुलाकात की है। रहवासियों का कहना है कि बिल्डर पैसे लौटाए या नई बिल्डिंग दे। एडवोकेट एमपी सिंह का कहना है कि ऐसी स्थिति में पीड़ित परिवार को कोर्ट रिफंड दिला सकता है या फिर नए सिरे से बिल्डिंग बनाने का आदेश दे सकता है। इसमें बिल्डिंग की गुणवत्ता पर नगर निगम को भी पार्टी बनाया जा सकता है। कोर्ट बिल्डर पर FIR के आदेश भी दे सकता है।बिल्डर के इशारे पर ठेकेदार ने मल्टी को साधने के लिए आठ नए पिलर बनाए हैं, लेकिन वह भी खानापूर्ति के लिए बनाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि उनकी क्वालिटी इतनी खराब है कि वह अभी से झड़ने लगे हैं। अंदर पुराने दो पिलर में और क्रेक आ गए हैं। हर पिलर में सीलन है। जिस कारण लोगों का कहना है कि यदि यहां रुकते हैं तो अपनी मौत को दावत देना है।
गोल्डन टॉवर में रहने वाले परिवार रोज सुबह से शाम तक बिल्डिंग एरिया के आसपास बैठे रहते हैं। उनको लगता है कि अब बिल्डर आएगा कोई राहत वाली बात करेगा, लेकिन घटना के बाद से बिल्डर मोहन बांदिल एक बार भी मिलने नहीं आया है। बल्कि मल्टी में रहने वालों का कहना है कि उनको और लोगों से पता लगा है कि बिल्डर कह रहा था मेरा कोई कुछ नहीं उखाड़ पाएगा। अब स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि हमारे रुपए वापस नहीं दिए या नई बिल्डिंग बनाकर नहीं दी तो हंगामा करेंगे। बिल्डर पर मामला दर्ज कराने एसपी ऑफिस का घेराव करेंगे।गोल्डन टॉवर में रहने वाली शशि प्रभा का कहना है कि उन्होंने बिल्डर मोहन बांदिल से यह यह फ्लैट साल 2016 में खरीदा था। उन्होंने बैंक से 30 लाख रुपए में फ्लैट फाइनेंस कराया था। उनका लगभग 20 लाख रुपए अभी बकाया है। 16 की रात को जब ब्लास्ट के साथ पिलर ध्वस्त हुआ तो शोर हुआ कि बिल्डिंग गिरने वाली है तो हमें लगा कि जल्द से जल्द कैसे भी नीचे पहुंचे। आज 10 दिन हो गए रिश्तेदारों के घर रहते हुए। बिल्डर मोहन बांदिल के नेताओं, मंत्रियों से संबंध हैं। उनका कहना है कि मैंने तो फ्लैट बेच दिए अब मैं कुछ नहीं कर सकता। ऐसे में हम कहां जाएंगे हमारा तो पूरा घर ही उजड़ गया। हम अंतिम सांस तक बिल्डर पर मामला दर्ज कराने और सजा दिलाने के लिए लड़ेंगे। इसके लिए जल्द आंदोलन करने जा रहे हैं।