
ग्वालियर। परिवहन विभाग की चैकपोस्ट पर भ्रष्टाचार का अंकुश लगाने के लिये बगैर तैयारी के गुजरात मॉडल लागू किया गया है। जिसका नतीजा यह हुआ कि करोड़ों के रूप में आने वाला राजस्व लाखों में सिमट कर रह गया। इस विभाग की प्रमुख सीटों पर वर्तमान में इतने अधिक प्रतिभावान अधिकारियों को बैठाला गया है कि उनकी जितनी बढ़ाई की जाये कम ही है। इन अधिकारियों के सिर पर भ्रष्टाचार का चंदन लगा है।
भ्रष्टाचार की दुहाई देने वाले अधिकारियों की गिरेबां में झांकने पर पता चला कि कुछ सच्चाई से आप अचंभित भी हो सकते हैं। सूत्र बता रहे है कि ग्वालियर आरटीओ टीसी को 25 लाख का चढ़ावा दे रहे हैं। वहीं प्रदेश में कुल 51 आरटीओ कार्यालय हैं तो क्या यह अनुमान लगाना गलत होगा कि टीसी माहवारी 10 करोड़ से अधिक की मलाई समेट कर स्वयं को ईमानदारी की मूर्ती साबित कर रहे हैं। काफी लोग इनके अतीत को गृह विभाग में होने वाले खेलों से पहचानते हैं। वहीं आरटीओ ऑफिस में होने वाली अवध वसूली का खेल चलता है। वहाँ यदि एचके सिंह जैसा इसान आरटीओ की सीट पर बैठाल दिया जाये तो यह ग्राफ नीचे जाने की अपेक्षा ऊपर ही बढ़ता है। हाल ही में कुछ समय पूर्व विभाग के सेवानिवृत अधिकारी के जश्न में आरटीओ एचके सिंह भी पहुंचे थे। तभी आरटीओ एचके सिंह से रहा न गया और उन्होंने भी एक राज खोल डाला कि मैं भी बहुत परेशान हूं 25 पेटी का चढ़ावा हर महिने टीसी साहब को देना पड़ रहा हैं। बात में कितनी सच्चाई है यह तो एचके सिंह और डीपी गुप्ता बता सकते हैं, लेकिन समय की नजाकत और हालात तो इस बात को सच होने पर जोर दे रहे हैं। क्योंकि इन दिनों आरटीओ एचके सिंह एसटीए का अतिरिक्त चार्ज भी संभाले हैं तो मामला तो बनता है।

