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हनुमान जी चारों वेदों के ज्ञाता थे: मुरारी बापू

लहार (भिण्ड). आधुनिक युग तुलसी राष्ट्रीय संत और भारत के मानस मर्मज्ञ श्री मुरारीबापू ने पूज्य व्यासपीठ से अपनी रामकथा के छठवें दिन की शुरूआत हनुमान चालीसा से की। इससे पहले पूज्य मुरारी बापू ने पूज्य व्यासपीठ की परिक्रमा कर पूज्य व्यास पीठ पर स्थान ग्रहण किया। आज संत श्री मुरारी बापू अनन्त विभूषित पूज्य महाराज श्री रविशंकर जी (रावतपुरा सरकार) कर्मयोगेष्वर के साथ पूज्य व्यासपीठ पर पहुंचे। इस अवसर पर वेद षिक्षा ग्रहण कर रहे षिक्षार्थियों ने शंख, घण्टे, घडियाल बजाकर पूज्य बापू का स्वागत किया। रामकथा की शुरूआत वेदपाठ आ नो भद्राः क्रतवो के साथ हुई। अनन्त विभूषित…

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लहार (भिण्ड). आधुनिक युग तुलसी राष्ट्रीय संत और भारत के मानस मर्मज्ञ श्री मुरारीबापू ने पूज्य व्यासपीठ से अपनी रामकथा के छठवें दिन की शुरूआत हनुमान चालीसा से की। इससे पहले पूज्य मुरारी बापू ने पूज्य व्यासपीठ की परिक्रमा कर पूज्य व्यास पीठ पर स्थान ग्रहण किया। आज संत श्री मुरारी बापू अनन्त विभूषित पूज्य महाराज श्री रविशंकर जी (रावतपुरा सरकार) कर्मयोगेष्वर के साथ पूज्य व्यासपीठ पर पहुंचे। इस अवसर पर वेद षिक्षा ग्रहण कर रहे षिक्षार्थियों ने शंख, घण्टे, घडियाल बजाकर पूज्य बापू का स्वागत किया। रामकथा की शुरूआत वेदपाठ आ नो भद्राः क्रतवो के साथ हुई। अनन्त विभूषित पूज्य महाराज श्री रविशंकर जी (रावतपुरा सरकार) कर्मयोगेष्वर ने रामकथा को आम भक्तों के बीच बैठकर सुना संतश्री मुरारी बापू ने रामकथा की शुरूआत सियाराम, सियाराम, सियाराम, सिय, सिय श्रीराम के साथ करी। इसके बाद उन्होंने हनुमान चालीसा का संगीतमय पाठ किया। उन्होंने कहा कि इस पावन रावतपुरा हनुमान जी के चरणों में प्रणाम करते हुए पवन तनय हनुमान के साथ इस स्थान के परमपूज्यनीय रविषंकर जी रावतपुरा सरकार के चरणों में प्रणाम करता हूं। यहां उपस्थित सभी पूज्य संत विद्वानगण और भक्तगणों को व्यासपीठ से आज शीत लहर सहन करने के लिए मेरा प्रणाम जय श्रीराम। शीतलहर का ग्रहण सबको पकडकर बैठा हुआ है। धन्य है रावतपुराधाम में आने वाले रामकथा के भक्तगणों जो आदमी पानी में उंगली नहीं डुबा सकता वहां आप ठण्डे पानी से नहाकर आ रहे हैं।
उन्होंने कहा मानस पवन तनय जो रावतपुरा धाम में रामकथा का केन्द्र बिन्दू है। गुरू और ग्रंथ कृपा से हम स्वात्तिक संवाद एवं चर्चा कर रहे है। जामवन्त जी ने भगवान राम को पवन तनय चरित्र के बारे में विस्तृत रूप से बताया वहीं भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते है कि हनुमान जी दिव्य है हनुमान जी की जन्म की अनेक कथाऐं हैं एक कथा तो हम कल 25 दिसम्बर को अंजना माॅ के बारे में सुना चुके हैं। दूसरी कथा यह है जब समुद्र मंथन हुआ तो विष और अमृत निकले अमृत के बंटवारे के समय जो मोहनी रूप ईष्वर ने धारण किया था भगवान षिव मोहनी रूप का दर्षन करते करते इतना खो गये उस घटना से परमतत्व का जन्म हुआ। यहीं है हनुमान जी। संतश्री मुरारी बापू ने कहा रावतपुरा गुरूदेव ने मुझे अंग्रेजी सिखा दी क्योंकि पिछले शब्द श्री मुरारी बापू ने अंग्रेजी में बोले थे आयुर्वेद का सूत्र है जीवन की ऊर्जा को साधक जितना ग्रहण करता है उसे जीवन कहते है और जीवन की ऊर्जा जिसमें पतन होती है वह मरण का संदेष होता है। आयुर्वेद निदान की चर्चा करता है रोगों के निदान की चर्चा करता है। उन्होंने एक कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान हनुमान लंका दहन के बाद समुद्र में स्नान कर रहे थे तो उनके शरीर के पसीने की बूंद एक मछली ने पी ली और उस मछली से जो बालक का जन्म हुआ मकरध्वज है। वह अहिरावण की सेवा में लगा रहा। इस परम तत्व रस का टपकना मरण नहीं जीवन है। हम नकारात्मक सोचने के आदि हैं लोग जागरूक होते जा रहे है। मूल सत्य को व्यर्थ समझते हैं। नवजीवन के लिए आलोचना नहीं होनी चाहिए उस घटना से हनुमान जी का जन्म हुआ।
किषकिन्धा काण्ड में जब राजा सुग्रीव हनुमान जी को रामलक्ष्मण के बारे में जानकारी लेने के लिए भेजता है तब हनुमान जी ब्राम्ह्मण के भेष में थे राम जबाव नहीं देते। बाल्मीक रामायण में स्पष्ट लिखा है राम लक्ष्मण से कहते है यह ब्राम्ह्मण जिस भाषा में बोल रहा है उससे स्पष्ट है कि यह चारों वेद का ज्ञाता है। मैं अभी जानकी के वियोग में दुखी हूं लेकिन इस ब्राम्ह्मण को सुनने में मुझे आनन्द हो रहा है यह प्रकाण्ड विद्वान है। यह एक साधारण मनुष्य नहीं एक ज्ञानी ही बोल सकता है पूरे ग्रंथ का सार यही है।
प्रवचन हैण्डपम्प हुआ और कथा एक  नदी
संतश्री मुरारी बापू ने कहा कि रामकथा बोलना मेरा स्वाध्याय है मेरा प्रवचन अभी शुरू नहीं हुआ है। प्रवचन के लिए एक बडी तपस्या चाहिए और भाषण तो कोई भी बोल सकता है। प्रवचन तप मांगता है जब कोई बोलने वाला मिल जाये तो उसका सत्य बोलता है और मैं प्रवचन करूंगा तब निवृत्त हो जाऊंगा। उपनिषद कहते हैं प्रवचन करने से प्रतिष्ठा मिलती है रामकथा प्रवचन नहीं कथा है कथा है प्रवचन में एक से डेढ घण्टा लगता है और ओषो डेढ घण्टे प्रवचन करते थे। कथा से आत्मा क्या परमात्मा मिलते हैं ? और कथा चार घण्टे चलती है प्रवचन हैण्डपम्प हुआ और कथा एक विषाल नदी है। संत श्री मुरारी बापू ने रामचरित मानस की चैपाई सुनी मुनि वचन प्रेम रस साने, सकुचि राम मन महूं मुस्काने सुनाई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वेद को पढना धर्म है, वेद को बेचना अधर्म है धर्म पोषक होना चाहिए शोषक नहीं।
हनुमान जी में चार प्रकार की पवित्रता 
संतश्री मुरारी बापू ने पवन तनय के शब्दार्थ को बताते हुए कहा कि इसका मतलब पवन पुत्र और पवन सुत होता है हानुमान जी में चार प्रकार की पवित्रता है। प का अर्थ पवित्रता हनुमान जैसी पवित्रता किसी में नहीं मिलेगी। हनुमान जी स्वयं स्वर्ण है। व का अर्थ वनचर अर्थात हनुमान जी वनचर है। पवन तनय शाखा मृग हैं वन निवासी हैं गोस्वामी तुलसीदास कहते है कि हनुमान नीति निपुण है, हनुमान जी नीति निर्धारक हैं, हनुमान में अर्थ पावित्रय है, हनुमान जी काम पावित्रय है, मोक्ष पावित्रय हैं, हनुमान जी विनम्र हैं, विनम्रता के आचार्य हैं हनुमान जी यज्ञ पुत्र है, यज्ञप्रसाद हैं।
श्रेष्ठ मनुष्य दूसरों का आदर करते हैं
भगवान श्रीराम चार भाई नहीं पाॅच भाई थे इनके पांचवे भाई हनुमान हैं यह बात आज रामकथा के छठे दिन संतश्री मुरारी बापू ने रामकथा के दौरान कही। हनुमान चालीसा की चैपाई सुनाते हुए शंकर सुवन केसरी नंदन’ तेज प्रताप महा जगवंदन, लाय संजीवन लखन जियाए ’ श्रीरघुबीर हरषि उर लाए उन्होंने कहा कि हनुमान जी का जन्म दिव्य और कर्म भी दिव्य है यहीं से हनुमन्त चरित्र आरम्भ होता है। ब्राम्ह्मण भेष धरते हुए भी उन्हांेने भगवान रामचन्द्र जी को प्रणाम किया। सच्चा ब्राम्ह्मण वही है जो पूरी दुनिया को प्रणाम करता है। श्रेष्ट मनुष्य दूसरों का आदर करते हैं जिस तरह अग्नि धुंए को ऊपर रखती है और पर्वत तिनके को ऊपर रखता है कोई जब तुम्हारा हृदय तोड दे तडपता हुआ जब कोई तुम्हें छोड दे, तब तुम मेरे पास आना प्रिय मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा  इसकी संगीतमय प्रस्तुति देकर उन्होंने कहा कि यह किसी बुद्ध पुरूष का संगीत है उन्होंने इस अवसर पर भगवान बुद्ध की कहानी सुनाते हुए कहा कि कणिका नाम की नगर वधु के यहां भिक्षा लेने के लिए गए उसने भिक्षा इंकार कर दिया। तब भगवान बुद्ध ने कहा कि अभी तुम्हें मेरी जरूरत नहीं है अभी तो करोडपति लोग आपको घेरे बैठे हैं जब सब तुझे छोड दें। तब बुद्धम शरणम गच्छामि करके मेरे पास आना जब कणिका बुजुर्ग हुई पहले कणिका जब पानी मांगती थी लोग उसे दूध देते थे बुढापे के कारण सबने उसे त्याग दिया। कणिका को कुष्ट रोग हुआ वह एक वृक्ष के नीचे पानी पानी की आवाज लगा रही थी भगवान बुद्ध हाजिर हुए और भगवान बुद्ध के हाथों से वह पानी पीते ही निर्वाण कर गई। जब आप समय से हार जाये तो बुद्ध पुरूष के पास जायें। बुद्ध पुरूष हमारे स्वभाव को जान लेता है अवस्था देखकर ही बुद्ध पुरूष निर्णय लेता है।
संतश्री ने आमंत्रण दिया
संतश्री मुरारी बापू ने उपस्थित भक्तगणों से कहा कि रावतपुरा धाम में रामकथा के दौरान आपकी रोटी खा रहा हूं। अब मैं आप सबको निमंत्रण देता हंू आप भी हमारे यहां आये और हमारा निमंत्रण स्वीकार करें।
अन्न ब्रम्ह्म होता है
संतश्री मुरारी बापू ने एक कथा और सुनाते हुए कहा कि भगवान बुद्ध ने प्यास लगने पर एक लडकी से पानी मांगा लड़की ने कहा कि वह दलित और अछूत है बुद्ध ने कहा कि मैंने तेरे से जाति नहीं पूछी पानी मांगा है ऐसे थे भगवान बुद्ध। दलित की मां बेटी भिक्षा दे रही है तो समझो माॅ जानकी और पार्वती भिक्षा दे रही है आपकी थाली में अन्न नहीं ब्रम्ह्म परोसा जा रहा है। दूसरों को भोजन भक्तिभाव से करायें भोजन पाने वाला गरीब नहीं ब्रम्ह्म होता है।
भगवान श्रीराम ने रामअवतार के समय सात सवारी की थी
संतश्री मुरारी बापू ने रामकथा के दौरान एक महत्ती जानकारी देते हुए बताया कि भगवान श्रीराम ने रामअवतार के समय सात सवारी की हैं अष्व की जब विष्वामित्र लेने आए, विवाह के वक्त कामदेव की, जब वनवास हुआ तब रथ में गए, केवट ने नौका से नदी पार कराई, सुग्रीव से मिलने के लिए हनुमान जी के कंधे की सवारी की, रामरावण युद्ध में तेज पूज्य रथ यह धर्म रथ था, लंका विजय के बाद पुष्पक विमान से लौटे। हनुमान सूर्यवीर है, धर्मवीर हैं, सत्यवीर हैं, सहनषीलता है, जय जय जय हनुमान गोंसाई कृपा करऊं गुरूदेव की नाहीं निरन्तर राम नाम जपने से वैचारिक संतोष मिलता है। हनुमान का मन स्थिर है उनके निर्मल मन का कोई वर्णन नहीं कर सकता। इस अवसर पर संतश्री मुरारी बापू ने कहा राममंत्र का कोई तोड नहीं राममंत्र मांगलिक है हर किसी का मंगल करने वाला है। काल के काल भी राममंत्र सुनकर लौट जाते हैं इस समय राहू सूरज को मुक्त कर रहा है। मैं भी आज आपको अपनी कथा से मुक्त कर रहा हूं। हरे रामा हरेरामा रामा रामा हरे हरे……हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे।
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