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कमलनाथ जी, माफिया के नाम पर घड़ियाली आंसू क्यों: गोविंद मालू

प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ का माफियाओं और संगठित अपराध के ख़िलाफ़ बिगुल, नए कानून बनाने की बात "थोथा चना बाजे घना" की उक्ति को चरितार्थ करने जैसा है। नाथ मुँह में राम बगल में छुरी जैसी दो मुँही राजनीति के भीष्म पितामह हैं। एक वक्तव्य में खनिज निगम के पूर्व उपाध्यक्ष गोविन्द मालू ने श्री नाथ को याद दिलाया कि जब प्रदेश में भाजपा सरकार थी,तब एक विधेयक "मध्यप्रदेश आतंकवादी एवं उच्छेदक गतिविधियां तथा संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक, 25 मार्च 2010 को विधानसभा में पारित कर कानून बनाने के लिए केंद्र की स्वीकृति के लिए भेजा तब यूपीए सरकार…

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प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ का माफियाओं और संगठित अपराध के ख़िलाफ़ बिगुल, नए कानून बनाने की बात “थोथा चना बाजे घना” की उक्ति को चरितार्थ करने जैसा है। नाथ मुँह में राम बगल में छुरी जैसी दो मुँही राजनीति के भीष्म पितामह हैं।
एक वक्तव्य में खनिज निगम के पूर्व उपाध्यक्ष गोविन्द मालू ने श्री नाथ को याद दिलाया कि जब प्रदेश में भाजपा सरकार थी,तब एक विधेयक “मध्यप्रदेश आतंकवादी एवं उच्छेदक गतिविधियां तथा संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक, 25 मार्च 2010 को विधानसभा में पारित कर कानून बनाने के लिए केंद्र की स्वीकृति के लिए भेजा तब यूपीए सरकार थी और कमलनाथ केंद्र में मंत्री थे,यह कानून को स्वीकृति नही दिलाने में उनकी अग्रणी भूमिका रही।
क्या तब वे माफियाओं के संरक्षण दाता थे? या अब घड़ियाली आँसू बहाकर माफियाओं के नाम पर विरोधियों को निपटाने का उपक्रम चला रहे हैं। मालू ने यह जानना चाहा कि क्या संगठित अपराध और माफियाओं की जानकारी पुलिस के पास नहीं होती। सरकार ईमानदारी से चाह ले तो 24 घण्टे में पूरे प्रदेश के माफियाओं को नेस्तनाबूद किया जा सकता है। सरकार केवल वसूली,सरकारी फिरौती के अपने कांग्रेसी धंधे के लिए माफ़िया फोबिया पैदा कर भय पैदा कर रही है।वाकई कुछ करना धरना होता तो कानून को लागू करते,और निष्पक्ष कार्रवाई की छूट प्रशासन को देते।

प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ का माफियाओं और संगठित अपराध के ख़िलाफ़ बिगुल, नए कानून बनाने की बात "थोथा चना बाजे घना" की उक्ति को चरितार्थ करने जैसा है। नाथ मुँह में राम बगल में छुरी जैसी दो मुँही राजनीति के भीष्म पितामह हैं। एक वक्तव्य में खनिज निगम के पूर्व उपाध्यक्ष गोविन्द मालू ने श्री नाथ को याद दिलाया कि जब प्रदेश में भाजपा सरकार थी,तब एक विधेयक "मध्यप्रदेश आतंकवादी एवं उच्छेदक गतिविधियां तथा संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक, 25 मार्च 2010 को विधानसभा में पारित कर कानून बनाने के लिए केंद्र की स्वीकृति के लिए भेजा तब यूपीए सरकार…

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