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मध्यप्रदेश किस ‘कमल’ का? फैसला कल, सुबह 8 बजे शुरू होगी मतगणना; 33 मंत्रियों का भविष्य दांव पर

वह घड़ी आ गई है, जिसका न केवल भाजपा और कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक दल, बल्कि मध्य प्रदेश की नौ करोड़ जनता को भी है। दोनों ही पार्टियों ने दमदार तरीके से चुनाव लड़ा। भाजपा की ओर से जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान फ्रंटरनर बने हुए थे, वहीं कांग्रेस की ओर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के हाथ में बागड़ोर थी। सत्ता का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह तो रविवार को ही पता चलेगा। इससे पहले दोनों ही पार्टियों ने अपनी-अपनी जीत के दावे किए हैं। दस एग्जिट पोल में भी चार में भाजपा को बहुमत और दो में कांग्रेस…

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वह घड़ी आ गई है, जिसका न केवल भाजपा और कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक दल, बल्कि मध्य प्रदेश की नौ करोड़ जनता को भी है। दोनों ही पार्टियों ने दमदार तरीके से चुनाव लड़ा। भाजपा की ओर से जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान फ्रंटरनर बने हुए थे, वहीं कांग्रेस की ओर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के हाथ में बागड़ोर थी। सत्ता का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह तो रविवार को ही पता चलेगा। इससे पहले दोनों ही पार्टियों ने अपनी-अपनी जीत के दावे किए हैं। दस एग्जिट पोल में भी चार में भाजपा को बहुमत और दो में कांग्रेस को बहुमत मिलने का दावा किया गया है। चार एग्जिट पोल में कांटे का मुकाबला दिखाया गया है।
मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 सीटों के लिए 17 नवंबर को मतदान हुआ था। इस बार 2533 प्रत्याशी मैदान में थे। अब तक हुए विधानसभा चुनावों के सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए मध्य प्रदेश में पहली 77.15% वोटिंग हुई है। इसमें भी 78.21% पुरुष और 76.03% महिलाओं ने मतदान किया। इसके मुकाबले 2018 के चुनावों में 75.2% वोटिंग हुई थी, जो इससे पहले तक एक रिकॉर्ड थी। रविवार को जिला मुख्यालयों के स्ट्रांग रूम से ईवीएम निकालकर मतों की गिनती का काम सुबह आठ बजे शुरू होगा। एक घंटे बाद रुझान आने लगेंगे। उम्मीद की जा रही है कि रविवार सुबह 10 बजे तक सभी सीटों के रुझान मिल जाएंगे। 2018 की बात करें तो भाजपा को 109 और कांग्रेस को 114 सीटें मिली थी। बसपा को दो, सपा को एक और निर्दलियों को चार सीटें मिली थी। कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस ने 15 साल बाद मध्य प्रदेश में सरकार बनाई थी। हालांकि, 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में कांग्रेस के विधायकों ने इस्तीफा दिया और भाजपा में शामिल हुए। तब शिवराज सिंह चौहान फिर मुख्यमंत्री बने। साढ़े तीन साल में भाजपा ने उन गलतियों को दूर करने की भरसक कोशिश की, जिनकी वजह से उसे 2018 में सत्ता से दूर होना पड़ा था। लाड़ली बहना जैसी योजनाएं भी लागू की, जिसके तहत करीब 1.31 करोड़ महिलाओं के खाते में हर महीने 1,250 रुपये डाले जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री समेत 33 मंत्रियों का भविष्य दांव पर
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मुख्यमंत्री समेत 33 मंत्रियों को चुनाव मैदान में उतारा है। शिवपुरी से यशोधरा राजे सिंधिया ने स्वास्थ्य कारणों से चुनाव नहीं लड़ा। सिंधिया समर्थक मंत्री ओपीएस भदौरिया का टिकट काटा गया है। वह मेहगांव से विधायक थे। इन्हें छोड़ दें तो 32 मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर है। भाजपा ने ज्यादातर विधायकों को फिर मौका दिया है। साथ ही कई सीटों पर पूर्व विधायक चुनाव मैदान में हैं।

वह घड़ी आ गई है, जिसका न केवल भाजपा और कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक दल, बल्कि मध्य प्रदेश की नौ करोड़ जनता को भी है। दोनों ही पार्टियों ने दमदार तरीके से चुनाव लड़ा। भाजपा की ओर से जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान फ्रंटरनर बने हुए थे, वहीं कांग्रेस की ओर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के हाथ में बागड़ोर थी। सत्ता का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह तो रविवार को ही पता चलेगा। इससे पहले दोनों ही पार्टियों ने अपनी-अपनी जीत के दावे किए हैं। दस एग्जिट पोल में भी चार में भाजपा को बहुमत और दो में कांग्रेस…

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