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चर्चा: आमजन यहीं पूछ रहे कौन किस पर भारी

चुनावी हलचल मतदान के साथ समाप्त हो गई, लेकिन फिर भी चुनावी चर्चा चलती रही। उम्मीदवार से लेकर कार्यकर्ता और फुसर्ती क्षणों में आमजन दिनभर यहीं पूछते रहे कौन किस पर भारी है। बुधवार को मतदान थमने के बाद गुरूवार को माथापच्ची का दौर चला। सुबह की चाय की चुसकियों के साथ शुरू हुआ मंथन और कयासों का दौर दिनभर चलता रहा। कोई कहता अबकी बार बदलाव के लिये झूर के वोट पड़ा है तो कोई कहता दिखा सत्ता समर्थन लहर है। इसके अलावा ग्वालियर की छह सीटों पर भी कयासों का बाजार गर्म रहा। ग्वालियर शहर की 3, ग्रामीण…

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चुनावी हलचल मतदान के साथ समाप्त हो गई, लेकिन फिर भी चुनावी चर्चा चलती रही। उम्मीदवार से लेकर कार्यकर्ता और फुसर्ती क्षणों में आमजन दिनभर यहीं पूछते रहे कौन किस पर भारी है।
बुधवार को मतदान थमने के बाद गुरूवार को माथापच्ची का दौर चला। सुबह की चाय की चुसकियों के साथ शुरू हुआ मंथन और कयासों का दौर दिनभर चलता रहा। कोई कहता अबकी बार बदलाव के लिये झूर के वोट पड़ा है तो कोई कहता दिखा सत्ता समर्थन लहर है। इसके अलावा ग्वालियर की छह सीटों पर भी कयासों का बाजार गर्म रहा। ग्वालियर शहर की 3, ग्रामीण की 2 व डबरा की सीट पर भी लोग अपने-अपने दावे व कयास जताते दिखे।
वहीं ग्वालियर चंबल अंचल की 34 सीटों पर भी अटकलों का बाजार गर्म रहा। दिनभर चले हार-जीत के गुणाभाग में इस बात का भी बार-बार जिक्र किया गया कि मतगणना में इतने दिन का विलंब उम्मीदवारों के लिए बैचेनी बढ़ाने वाला है। साथ ही कार्यकर्ताओं की सांसे भी अटकी हुई है।

चुनावी हलचल मतदान के साथ समाप्त हो गई, लेकिन फिर भी चुनावी चर्चा चलती रही। उम्मीदवार से लेकर कार्यकर्ता और फुसर्ती क्षणों में आमजन दिनभर यहीं पूछते रहे कौन किस पर भारी है। बुधवार को मतदान थमने के बाद गुरूवार को माथापच्ची का दौर चला। सुबह की चाय की चुसकियों के साथ शुरू हुआ मंथन और कयासों का दौर दिनभर चलता रहा। कोई कहता अबकी बार बदलाव के लिये झूर के वोट पड़ा है तो कोई कहता दिखा सत्ता समर्थन लहर है। इसके अलावा ग्वालियर की छह सीटों पर भी कयासों का बाजार गर्म रहा। ग्वालियर शहर की 3, ग्रामीण…

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