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प्रतिदिन मंहगा होता संवाद और लुटती जनता

(राकेश अचल) तकनीक का चारा दिखाकर पहले दुनिया को मुठ्ठी में करने वाले कारोबारी अब मुठ्ठी में बंद अपने उपभोक्ताओं का तेल निकालने पर आमादा हो गए हैं ,और हमारी सरकार मौन सब तमाशा देख रही है ,क्योंकि सरकार ने दुनिया को मुठ्ठी में करने की अपने हिस्से की फीस पहले ही वसूल कर ली है भारत में जितनी भी मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियां है उनमें से अधिकाँश ने अपना संवाद शुल्क बढ़ा दिया है। इस मामले में ट्राई नाम की संस्थाएं जनता का करुण क्रंदन सुनने की स्थिति में ही नहीं हैं। दुनिया की दूसरी बड़ी आबादी वाले…

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(राकेश अचल)
तकनीक का चारा दिखाकर पहले दुनिया को मुठ्ठी में करने वाले कारोबारी अब मुठ्ठी में बंद अपने उपभोक्ताओं का तेल निकालने पर आमादा हो गए हैं ,और हमारी सरकार मौन सब तमाशा देख रही है ,क्योंकि सरकार ने दुनिया को मुठ्ठी में करने की अपने हिस्से की फीस पहले ही वसूल कर ली है भारत में जितनी भी मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियां है उनमें से अधिकाँश ने अपना संवाद शुल्क बढ़ा दिया है। इस मामले में ट्राई नाम की संस्थाएं जनता का करुण क्रंदन सुनने की स्थिति में ही नहीं हैं।
दुनिया की दूसरी बड़ी आबादी वाले भारत की 130 करोड़ आबादी में से कम से कम 116 करोड़ हाथों में मोबाइल सेट हैं। यानि मोबाइल आज भारत में परस्पर संवाद का सबसे बड़ा साधन है। रिलायंस ने सबसे पहले कर लो दुनिया मुठ्ठी में का नारा देकर इस आबादी के सामने सस्ते में संवाद का चारा डाला और आज यही कम्पनी अपने उपभोक्ताओं को दुहने में सबसे आगे है। जैसे सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर हाथ खड़े कर दिए थे वैसे ही अब मोबाइल सेवाओं के मंहगे होने पर मुंह बंद किये बैठी है। लगता है सरकार को आँखें और मुंह बंद करने के भी पैसे मिलते हैं।
मोबाइल सेवाएं देने वालों की किस्मत अच्छी और जनता की किस्मत खराब थी इसीलिए कोरोनाकाल में घरों में कैद लोगों को मोबाइल पर ज्यादा आश्रित होना पड़ा स्कूलों -कॉलेजों से लेकर नरसरी तक के बच्चों की पढाई आन लाइन हुई तो उपभोक्ताओं की संख्या में अचानक उछाल आ गया। भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है. ताजा आंकड़ों के अनुसार 30 सितंबर तक ग्रामीण क्षेत्रों में 302.35 मिलियन इंटरनेटउपभोक्ता थे और शहरी क्षेत्रों में 474.11 मिलियन। .यानि प्रति 100 की आबादी में 33.99 ग्रामीण इंटरनेट उपभोक्ता थे और प्रति 100 की आबादी में 101.74 शहरी इंटरनेट उपभोक्ता थे।
इधर उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ी तो उधर कंपनियों ने अपना सेवा शुल्क बढ़ाना शुरू कर दिया। भारती एयरटेल , रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया के प्रीपेड टैरिफ प्लान महंगे हो चुके हैं। इन टेलिकॉम कंपनियों ने अपने दाम 20 से 25 फीसदी तक बढ़ा दियेहैं,अकेले रिलायंस जिओ का 28 दिनों तक वैलिड रहने वाला प्लान 75 रुपये की जगह 91 रुपये का हो गया है। वहीं, एयरटेल और वोडाफोन यही प्लान 99 रुपये में दे रहे हैं। 129 रुपये से शुरू होने वाले अनलिमिटेड डेटा प्लान के लिए अब 28 दिनों के लिए 2GB डेटा वाले 155 रुपये का हो गया है। 24 दिनों के लिए 149 रुपये का 1GB डेटा प्रतिदिन वाला प्लान 179 रुपये का हो गया है।
इंटरनेट और मोबाइल पर आश्रित हो चुका उपभोक्ता ये जानकार हैरान है कि रिलायंस जिओ ने 199 रुपये का रिचार्ज जिसकी वैलिडिटी 28 दिनों की थी वह 239 रुपये का हो गया है। इस प्लान में प्रतिदिन 1.5GB डेटा मिलता है। 2जीबी डेटा/दिन 28 दिनों के पैक के लिए 299 रुपये हो गया है। 399 रुपये का 56 दिनों का प्लान जो 1.5GB डेटा/दिन के साथ आता है, बढ़कर 479 कर दिया गया है। इसी तरह 56 दिन वाला 2GB डेटा/दिन का पैक वर्तमान 444 रुपये से 533 रुपये का हो गया ह। और तो और अब टॉपअप करना भी मंहगा हो गया है। 51 रुपये का टॉप अप पैक क्रमशः 61 रुपये, 101 रुपये वाला पैक से 121 रुपये और 251 रुपये वाला 301 रुपये का हो गया है। इनमें क्रमशः 6GB, 12GB और 50GB डेटा मिलता है।
रिलायंस का दुस्साहस देखकर एयरटेल ने भी अपनी सेवाओं के दाम बढ़ा दिए। एयरटेल ने 149 रुपये के प्लान को बढ़ाकर 179 रुपये कर दिया गया है। 219 रुपये के एयरटेल प्लान की कीमत 265 रुपये कर दी है। जबकि, 249 रुपये और 298 रुपये प्रीपेड प्लान की कीमत अब क्रमशः 299 रुपये और 359 रुपये होगी। टेलिकॉम कंपनी की सबसे फेमस 598 रुपये का प्रीपेड प्लान अब 719 रुपये में मिलेगा। एयरटेल ने अपने सभी प्रीपेड प्लान के रेट महंगा कर दिया है।अनलिमिटेड वॉयस बंडल और डेटा टॉप-अप शामिल है। 48 रुपये, 98 रुपये, और 251 रुपये के वाउचर अब 58 रुपये, 118 रुपये और 301 रुपये में मिले जाएगा। सभी प्लान्स में पुराने सभी लाभ को रखा गया है सिर्फ प्लान्स के दाम बढ़ा दिये गये हैं।
कहते हैं कि महाजन जब लूटने पर उत्तर आये तो वोडाफोन यानि पुराने आइडिया वालों ने भी अपनी सकल सेवाएं महंगी कर दीं। वोडाफोन का सबसे सस्ता प्लान अब 99 रुपये में मिल रहा है। सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले 249 रुपये के प्रतिदिन के 1.5GB डेटा वाले पैक की कीमत 28 दिनों के लिए 299 रुपये है। 1GB डेटा पैक के लिए पहले रुपये 219 के बजाय 269 रुपये का है।
299 रुपये का 2GB डेटा पैक वर्तमान में 28 दिनों की अवधि के लिए 359 रुपये हो गया है। 56 दिनों के पैक की कीमत अब आपको मौजूदा 449 रुपये से प्रति दिन 2GB डेटा के लिए 539 रुपये होगी। इसी तरह, 56 दिनों के लिए वैध 1.5GB डेटा पैक 399 रुपये के बजाय 479 रुपये लगाया जाएगा।
अब यहां मजबूरी का नाम महात्मा गांधी नहीं बल्कि आम जनता हो गया है । एक तरफ कंपनियां अपने दाम बढ़ा रहीं हैं वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।इस साल जून में भारती एयरटेल के 97,526 नए ग्राहक जुड़े. वहीं रिलायंस जियो को 5.43 लाख नए ग्राहक मिले. हालाँकि दूसरी तरफ वी [Vi ] ने 2.37 लाख ग्राहक और भारत दूर संचार निगम [ बीएसएनएल] के 1.24 लाख ग्राहक घटे हैं. कुल मिलाकर कुल ग्राहकों की संख्या में इजाफा हुआ है.
देश में स्थिति ये है कि अनेक राज्यों में वहां की आबादी से अधिक मोबाइल उपभोक्ता हो गए हैं। एक ही मोबाइल में दो या दो से अधिक सिम रखने के कारण शायद ऐसा हुआ है । उदाहरण के लिए दिल्ली की जनसंख्या 1,67,87,941 है, वहीं यहां करीब 5,44,34,596 मोबाइल कनेक्शन हैं. महाराष्ट्र की जनसंख्या 11,23,74,333 है और यहां पर करीब 13,18,65,450 मोबाइल उपभोक्ता हैं. अगर तमिलनाडू की आबादी 7,33,94,983 है और यहां मोबाइल उपभोक्ता 8,25,93,877 है. पंजाब की जनसंख्या 2,77,43,338 है और यहां मोबाइल इस्तेमाल करने वालों की तादाद 3,88,98,031 है. गुजरात में मोबाइल ग्राहकों की संख्या ने जनसंख्या के आंकड़े को पार कर दिया है. यहां की जनसंख्या 6,11,63,982 है जबकि यहां मोबाइल ग्राहकों की संख्या 7,00,02,527 है. जाहिर है कि जनता की मजबूरी का लाभ ही नहीं लिया जा रहा बल्कि उसे लूटा जा रहा है वो भी दोनों हाथों से। अब न सिर्फ जनता कंपनियों की मुठ्ठी में है बल्कि सरकार भी कंपनियों की मुठ्ठी में है। कोई इस खुली लूट को चुनौती देने वाला नहीं है। कोई न सड़क पर इस लूट के खिलाफ आवाज उठा रहा है और न संसद में ,जबकि लूटने वालों में आम जनता भी शामिल है और संसद में बैठने वाले लोग भी।

(राकेश अचल) तकनीक का चारा दिखाकर पहले दुनिया को मुठ्ठी में करने वाले कारोबारी अब मुठ्ठी में बंद अपने उपभोक्ताओं का तेल निकालने पर आमादा हो गए हैं ,और हमारी सरकार मौन सब तमाशा देख रही है ,क्योंकि सरकार ने दुनिया को मुठ्ठी में करने की अपने हिस्से की फीस पहले ही वसूल कर ली है भारत में जितनी भी मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियां है उनमें से अधिकाँश ने अपना संवाद शुल्क बढ़ा दिया है। इस मामले में ट्राई नाम की संस्थाएं जनता का करुण क्रंदन सुनने की स्थिति में ही नहीं हैं। दुनिया की दूसरी बड़ी आबादी वाले…

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