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ये नेतापुत्र राजनीति में आने को बेताब

BJP की विचारधारा यूं तो परिवारवाद और भाई भातीजा वाद के खिलाफ रही है, लेकिन चंबल अंचल में पार्टी और उसके नेताओं का चाल, चरित्र और चेहरा बदल रहा है. ग्वालियर चंबल अंचल से आने वाले दो केंद्रीय मंत्रियों के बेटे राजनीति में आने के लिए बेताब हैं. ये नेता पुत्र अपने दावे को मजबूत करने के लिए शक्ति प्रदर्शन भी कर रहे हैं. केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और ज्यातिरादित्य सिंधिया के बेटे अपनी ताकत दिखा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के नेता पुत्र भी पीछे नहीं है. ग्वालियर चंबल अंचल में नेता पुत्रों के बीच किसी न किसी बहाने…

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BJP की विचारधारा यूं तो परिवारवाद और भाई भातीजा वाद के खिलाफ रही है, लेकिन चंबल अंचल में पार्टी और उसके नेताओं का चाल, चरित्र और चेहरा बदल रहा है. ग्वालियर चंबल अंचल से आने वाले दो केंद्रीय मंत्रियों के बेटे राजनीति में आने के लिए बेताब हैं. ये नेता पुत्र अपने दावे को मजबूत करने के लिए शक्ति प्रदर्शन भी कर रहे हैं. केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और ज्यातिरादित्य सिंधिया के बेटे अपनी ताकत दिखा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के नेता पुत्र भी पीछे नहीं है.
ग्वालियर चंबल अंचल में नेता पुत्रों के बीच किसी न किसी बहाने शक्ति प्रदर्शन का दौर शुरू हो चुका है. माना जा रहा है कि बीजेपी में स्थापित नेताओं की तरफ से अपने बेटों को इसकी हरी झंडी भी दे दी गई है. यही वजह है कि अंचल के दोनों दिग्गज नेताओं के दोनों पुत्र अपने जन्मदिन के बहाने अपनी ताकत दिखा रहे हैं. कुछ दिनों पहले अंचल के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे प्रबल प्रताप सिंह तोमर उर्फ रघु के जन्मदिन के मौके पर लगी कार्यकर्ताओं की भीड़ और अब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमन सिंधिया के जन्मदिन पर समर्थकों का जश्न से साफ होता है कि दोनों नेता पुत्र अब राजनीति में एंट्री को बेताब हैं. हालांकि बीजेपी सांसद इसे जन्मदिन मनाने का एक सामान्य तरीका बताते हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमन 26 साल के हो चुके हैं. जिन्हें लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा चलती रहती है कि अन्य नेता पुत्रों की तरह ज्योतिरादित्य के बेटे भी राजनीति में इंट्री करेंगे.
जूनियर सिंधिया से जब उनकी राजनीतिक पारी शुरू करने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अभी तो ऐसा कुछ नहीं है, फिलहाल में अपने लोगों से मिल रहा हूं, उन्हें समझ रहा हूं, बात कर लूं, उसके बाद ही कोई फैसला लूंगा. मतलब साफ है कि महा आर्यमन राजनीति में आने की तैयारी शुरू कर चुके हैं. जन्मदिन के मौके पर शक्ति प्रदर्शन कर उन्होंने इसके संकेत भी दे दिए हैं. इसके अलावा वरिष्ठ नेता प्रभात झा के बेटे तुष्मुल झा, नरोत्म मिश्रा के बेटे भी राजनीति में खुद को स्थापित करने की राह तलाश रहे हैं. नेता पुत्रों के राजनीति के मैदान में उतारने का कांग्रेसियों को भी खास अनुभव है. पूर्व सीएम कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ, दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह, सुभाष यादव के बेटे अरुण यादव ऐसे नाम हैं जो राजनीति में स्थापित हो चुके हैं तो वहीं कई और नए ‘युवराज’ खुद को स्थापित करने की कोशिश में जुटे हुए हैं.
BJP की विचारधारा यूं तो परिवारवाद और भाई भातीजा वाद के खिलाफ रही है, लेकिन चंबल अंचल में पार्टी और उसके नेताओं का चाल, चरित्र और चेहरा बदल रहा है. ग्वालियर चंबल अंचल से आने वाले दो केंद्रीय मंत्रियों के बेटे राजनीति में आने के लिए बेताब हैं. ये नेता पुत्र अपने दावे को मजबूत करने के लिए शक्ति प्रदर्शन भी कर रहे हैं. केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और ज्यातिरादित्य सिंधिया के बेटे अपनी ताकत दिखा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के नेता पुत्र भी पीछे नहीं है. ग्वालियर चंबल अंचल में नेता पुत्रों के बीच किसी न किसी बहाने…

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