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मोदी जी की अमरीका यात्रा का प्रतिफल

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की हाल की अमरीका यात्रा के बारे में कही-सुनीय बातों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए,यहां तक की दोनों देशों की आधिकारिक सचिव स्तरीय पत्रकार वार्ता पर भी .इस यात्रा के प्रतिफल के बारे में मोदी जी खुद ही जब तक न बताएं ,कुछ पता नहीं चल सकता .परमपतानुसार अपनी अमरीका यात्रा के बारे में प्रधानमंत्री स्वदेश वापस आते ही सबसे पहले राष्ट्रपति जी को जानकारी देंगे,[वैसे उन्होंने जाने से पहले भी ऐसा नहीं किया था ]बाद में शायद देश को कुछ बताएँगे . मोदी जी की अमरीका यात्रा को लेकर हवाई जहाज से बाहर…

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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की हाल की अमरीका यात्रा के बारे में कही-सुनीय बातों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए,यहां तक की दोनों देशों की आधिकारिक सचिव स्तरीय पत्रकार वार्ता पर भी .इस यात्रा के प्रतिफल के बारे में मोदी जी खुद ही जब तक न बताएं ,कुछ पता नहीं चल सकता .परमपतानुसार अपनी अमरीका यात्रा के बारे में प्रधानमंत्री स्वदेश वापस आते ही सबसे पहले राष्ट्रपति जी को जानकारी देंगे,[वैसे उन्होंने जाने से पहले भी ऐसा नहीं किया था ]बाद में शायद देश को कुछ बताएँगे .
मोदी जी की अमरीका यात्रा को लेकर हवाई जहाज से बाहर निकलने से लेकर वापसी तक तरह-तरह की बातें की जा रहीं हैं. जैसे की हवाई अड्डे पर अमरीका ने उनकी अगवानी पूर्व के प्रधानमंत्रियों की तरह सम्मानजनक तरिके से नहीं की ,या अमरीकी राष्ट्रपति श्रीमती कमला हैरिस प्रधानमंत्री को अपने दफ्तर के गलियारे में घुमाती रहीं .या संयुक्त राष्ट्र की जिस सभा में मोदी जी बोले उसमें सदस्य देशों की उपस्थिति नगण्य थी .मुमकिन है की ये तमाम खबरें सही हों और मुमकिन है की सही न भी हों ,लेकिन इनसे ये प्रमाणित नहीं किया जा सकता कि मोदी जी की इस यात्रा का प्रतिफल क्या रहा ?
संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में मोदी जी का भाषण ठीक वैसा ही रहा जैसा कि अपेक्षा की जा रही थी. वे संयुक्त राष्ट महासभा को भी लगता है भाजपा राष्ट्रीय कार्य समिति कि बैठक समझ बैठे .मोदी जी ने महासभा की विश्वनीयता के बारे में जरूर महत्वपूर्ण बात कही किन्तु बाकी जो कुछ कहा उसका दुनिया से बहुत ज्यादा ताल्लुक नहीं लगता. मोदी जी को शायद स्मरण नहीं रहा कि वे जिस जमीन पर बोल रहे हैं वहां का लोकतंत्र इस युग का बहुत पुराना लोकतंत्र है.भारत को आजाद हुए अभी कुल 75 साल हुए हैं .
संयुक्त राष्ट्र महासभा को इस बात से कुछ लेना-देना नहीं है कि भारत के प्रधानमंत्री ने चाय बेचीं या गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कितने साल देश की सेवा की .प्रधानमंत्री ने ये कहकर कोई तीर नहीं मारा कि -‘मैं उस देश का प्रधानमंत्री हूं, जिसे मदर ऑफ डेमोक्रेसी कहा जाता है. लोकतंत्र की हमारी हजारों साल की परंपरा है. इस 15 अगस्त को भारत ने अपनी आजादी के 75वें साल में प्रवेश किया. हमारी विविधता, हमारे सशक्त लोकतंत्र की पहचान हैं. एक ऐसा देश, जिसमें दर्जनों भाषाएं हैं. सैकड़ों बोलियां हैं. अलग-अलग रहन-सहन, खान-पान हैं. ये लोकतंत्र की निशानी है. स्टेशन पर चाय बेचने वाले का बेटा चौथी बार संयुक्त राष्ट्र को संबोधित कर रहा है.दुनिया इस बारे में सब जानती है .
संयुक्त राष्ट महासभा में पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जिक्र कर प्रधानमंत्री जी ने भले ही अपने भक्तमंडल और नागपुर को खुश कर लिया हो लेकिन महासभा के अधिकाँश सदस्य उपाध्याय जी के बारे में किंचित ज्यादा जानते नहीं. भारत की पहचान महात्मा गांधी से है और रहेगी ,उन्हें महात्मा गांधी का जिक्र करना चाहिए था .उन्होंने कहा-यस डेमोक्रेसी कैन डिलीवर, यस डेमोक्रेसी हैज डिलीवर्ड. संयुक्त राष्ट्र में मोदी जी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उनके एकात्म मानवतावाद के दर्शन का भी जिक्र किया. कहा कि एकात्म मानवतावाद अंत्योदय को समर्पित है. यानी कोई पीछे न रह जाये. इसी अवधारणा के साथ भारत विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है. विकास सर्वसमावेशी हो, सर्वस्पर्शी हो, सर्वव्यापी हो यही हमारी प्राथमिकता है.
दुनिया को पंडित दीनदयाल से परिचित करने के लिए मोदी जी का कृतज्ञ हुआ जा सकता है,क्योंकि उनके पूर्ववर्ती किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने ऐसा नहीं किया.इसे ऐतिहासिक कहा और माना जा सकता है,[ये बात और है कि दुनिया के इतिहास में पंडित जी कितने दिनों तक मौजूद रह सकते हैं ] प्रधानमंत्री मोदी जी के भाषण में विस्तारवाद,विश्व अर्थ व्यवस्था,आतंकवाद ,कोरोना महामारी जैसे मुद्दे भी शामिल थे ,होना भी चाहिए थे लेकिन इन सबका क्या असर हुया ये जानने में देश की दिलचस्पी है. मोदी जी यदि अमेरिका में ही अपनी यात्रा के बारे में वहां के मीडिया से रूबरू होते तो शायद ज्यादा प्रभावी ढंग से अपनी अमरीका यात्रा के प्रतिसाद को प्रकट कर सकते थे,लेकिन दुर्भाग्य कि ऐसा कुछ हुआ नहीं. मोदी जी को या तो भारतीय मीडिया की तरह अमरीकी मीडिया से भी परहेज रहा या वे अमरीकी मीडिया का सामना करने का साहस नहीं जुटा पाए.हकीकत क्या है ये मोदी जी ही जानें.
प्रधानमंत्री जी कि इस अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कोई नया करार हुआ या नहीं,राम ही जानें,लेकिन मीडिया इतना जरूर जानती है कि मोदी जी अमेरिका से अपने साथ 157 कलाकृतियां और एंटीक वस्तुएं भी लेकर आ रहे हैं। इन कलाकृतियों को अमेरिका ने प्रधानमंत्री मोदी को उपहार के तौर पर सौंपा है। पीएम मोदी ने अपने अमेरिका यात्रा के दौरान बड़े-बड़े बिजनेस टॉयकून्स से भी मुलाकात की।इस मुलाकात के बाद क्या हुआ ,कोई नहीं जानता इतना ही नहीं, उन्होंने वाइट हाउस में जो बाइडन के साथ द्विपक्षीय बैठक में भी हिस्सा लिया। इस बैठक के परिणाम भी अभी गुप्त हैं .हालाँकि मोदी जी क्वाड के पहले वन टू वन शिखर सम्मेलन में शामिल होने के मकसद से अमेरिका गए थे .
अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान वे अपने किसी पुराने मित्र यानि पूर्व राष्ट्राध्यक्षों से नहीं मिले .क्यों नहीं मिले,ये वे ही जानें,लेकिन उनके न मिलने से ये अफवाह जरूर फ़ैल गयी कि मोदी जी की दोस्ती निजी नहीं थी .राष्ट्रप्रमुख के नाते ही उनके रिश्ते थे .वरना डोनाल्ड ट्रम्प और बराक ओबामा को वे कैसे भूलते .दुर्भाग्य ये कि इन दोनों ने भी मोदी जी को चाय पर आमंत्रित नहीं किया .बहरहाल पोरे देश को प्रतीक्षा है कि मोदी जी दिल्ली पहुंचकर एक शानदार पत्रकार वार्ता कर अपनी अमेरिका यात्रा की उपलब्धियों से देश को वाकिफ कराएं .
@ राकेश अचल

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की हाल की अमरीका यात्रा के बारे में कही-सुनीय बातों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए,यहां तक की दोनों देशों की आधिकारिक सचिव स्तरीय पत्रकार वार्ता पर भी .इस यात्रा के प्रतिफल के बारे में मोदी जी खुद ही जब तक न बताएं ,कुछ पता नहीं चल सकता .परमपतानुसार अपनी अमरीका यात्रा के बारे में प्रधानमंत्री स्वदेश वापस आते ही सबसे पहले राष्ट्रपति जी को जानकारी देंगे,[वैसे उन्होंने जाने से पहले भी ऐसा नहीं किया था ]बाद में शायद देश को कुछ बताएँगे . मोदी जी की अमरीका यात्रा को लेकर हवाई जहाज से बाहर…

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