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संकटमोचक बने ठाकुर साहब, अनुभवी को सौंप आये गुजरात

चुनावी दहलीज पर आ रहे गुजरात के साथ चंबल अंचल के ठाकुर साहब ने अपना अनुभव साझा कर दिया है। जब भी विकट परिस्थिति भाजपा के साथ आती है तो ठाकुर साहब ही संकटमोचक बनकर सामने आते है। अब देखिये ना जब आलाकमान ने गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन करने की सोची तो मुख्यमंत्री चुनने के लिए एक बार फिर ठाकुर साहब को ही चुना। इससे पहले हरियाणा, असम, उत्तराखण्ड में ठाकुर साहब ही पर्यवेक्षक बनकर गये और अपना सर्वश्रेष्ठ देकर आये। यहां बता दें कि एक साल बाद गुजरात में चुनाव है। लेकिन इससे पहले विरोध से गुजर रही बीजेपी…

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चुनावी दहलीज पर आ रहे गुजरात के साथ चंबल अंचल के ठाकुर साहब ने अपना अनुभव साझा कर दिया है। जब भी विकट परिस्थिति भाजपा के साथ आती है तो ठाकुर साहब ही संकटमोचक बनकर सामने आते है। अब देखिये ना जब आलाकमान ने गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन करने की सोची तो मुख्यमंत्री चुनने के लिए एक बार फिर ठाकुर साहब को ही चुना। इससे पहले हरियाणा, असम, उत्तराखण्ड में ठाकुर साहब ही पर्यवेक्षक बनकर गये और अपना सर्वश्रेष्ठ देकर आये।
यहां बता दें कि एक साल बाद गुजरात में चुनाव है। लेकिन इससे पहले विरोध से गुजर रही बीजेपी ने वहां नेतृत्व परिवर्तन कर लोगों के गुस्से को शांत करने की सोची। इसी के चलते विजय रूपाणी से इस्तीफा लिया गया और जब नया मुख्यमंत्री चुनने की बारी आई तो एक बार फिर केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर उर्फ ठाकुर साहब को ही पर्यवेक्षक बनाकर भेजा। ठाकुर साहब भी संगठन कौशल के माहिर वहां अपना अनुभव साझा कर आये। सीएम की कुर्सी की दौड़ में चल रहे सभी नामों को दरकिनार कर नया अनुभवी चेहरा भूपेन्द्र भाई पटेल को सत्ता की कमान सौंप डाली। भूपेन्द्र के नाम का ऐलान करते हुये ठाकुर साहब ने कहा कि गुजरात को अपना नया अनुभवी मुख्यमंत्री मिल गया है। सही कहा ठाकुर साहब ये तो आपका ही अनुभव था जो एक विधायक को राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया, वो भी वह शख्श जो पूर्व मुख्यमंत्री वर्तमान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की सीट से चुनाव लड़कर विधानसभा 2017 में पहुंचा था।
कहा जाता है कि भूपेन्द्र पटेल आलाकमान के काफी करीबी है, लेकिन गुजरात को हीरा तो ठाकुर साहब ही देकर आये। नहीं तो रेस में आगे चल रहे पूर्व डिप्टी सीएम नितिन पटेल तो अपना नाम नये सीएम के लिए मानकर चल रहे थे। परंतु कहते है ना सौ सुनार की और एक ठाकुर साहब की। वो ऐसे नेता को गुजरात की कमान सौंप कर आये जो संगठन का बेहद अनुभवी है। इस अनुभवी को ठाकुर साहब के अनुभव ने ही खोज कर एकराय बनाकर गुजरात की कमान सौंपी है।

चुनावी दहलीज पर आ रहे गुजरात के साथ चंबल अंचल के ठाकुर साहब ने अपना अनुभव साझा कर दिया है। जब भी विकट परिस्थिति भाजपा के साथ आती है तो ठाकुर साहब ही संकटमोचक बनकर सामने आते है। अब देखिये ना जब आलाकमान ने गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन करने की सोची तो मुख्यमंत्री चुनने के लिए एक बार फिर ठाकुर साहब को ही चुना। इससे पहले हरियाणा, असम, उत्तराखण्ड में ठाकुर साहब ही पर्यवेक्षक बनकर गये और अपना सर्वश्रेष्ठ देकर आये। यहां बता दें कि एक साल बाद गुजरात में चुनाव है। लेकिन इससे पहले विरोध से गुजर रही बीजेपी…

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