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सनातन धर्मः मेंबरशिप में भी खेला

भगवान की भक्ति का स्थल भी आजकल राजनीति का केन्द्र बनने लगा है। ग्वालियर का सुप्रसिद्ध सनातन धर्म मंदिर के मंडल में विराजमान पदाधिकारी खुद को खुदा समझने लगे है। उनका मानना है कि जैसा वह चाहते है बस वैसा ही होगा उनके लिए ना विधान मायने रखता है और ना ही संविधान है। जबकि यहां अच्छी संख्या में श्रद्धालु आराधना करने आते है और यह मंदिर लोगों की अगाध आस्था का केन्द्र भी है। वर्तमान में मंदिर में तमाम त्यौहारों की तैयारियां चल रही है। परंतु यहां के पदाधिकारी सब पर अपनी थोप रहे है। बरसो पुराने सदस्यों के…

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भगवान की भक्ति का स्थल भी आजकल राजनीति का केन्द्र बनने लगा है। ग्वालियर का सुप्रसिद्ध सनातन धर्म मंदिर के मंडल में विराजमान पदाधिकारी खुद को खुदा समझने लगे है। उनका मानना है कि जैसा वह चाहते है बस वैसा ही होगा उनके लिए ना विधान मायने रखता है और ना ही संविधान है। जबकि यहां अच्छी संख्या में श्रद्धालु आराधना करने आते है और यह मंदिर लोगों की अगाध आस्था का केन्द्र भी है। वर्तमान में मंदिर में तमाम त्यौहारों की तैयारियां चल रही है। परंतु यहां के पदाधिकारी सब पर अपनी थोप रहे है। बरसो पुराने सदस्यों के गुजर जाने के बाद संविधान अनुसार उनके परिवार के सदस्य की मेंबरशिप जिस शुल्क पर होनी चाहिए उस पर ना कर उनसे दोगुना चार्ज वसूला जा रहा है। इससे तानाशाही से खफा कहीं लोग इसकी शिकायतें भी कर रहे है, परंतु खुद को खुदा समझ बैठे तथाकथित पदाधिकारियों को उस भगवान का भी डर नहीं जहां बैठकर वह राजनीति कर रहे है। हम तो यहीं कहेंगे भगवान के स्थल को राजनीति से बचाईये….. जय श्रीकृष्णा

भगवान की भक्ति का स्थल भी आजकल राजनीति का केन्द्र बनने लगा है। ग्वालियर का सुप्रसिद्ध सनातन धर्म मंदिर के मंडल में विराजमान पदाधिकारी खुद को खुदा समझने लगे है। उनका मानना है कि जैसा वह चाहते है बस वैसा ही होगा उनके लिए ना विधान मायने रखता है और ना ही संविधान है। जबकि यहां अच्छी संख्या में श्रद्धालु आराधना करने आते है और यह मंदिर लोगों की अगाध आस्था का केन्द्र भी है। वर्तमान में मंदिर में तमाम त्यौहारों की तैयारियां चल रही है। परंतु यहां के पदाधिकारी सब पर अपनी थोप रहे है। बरसो पुराने सदस्यों के…

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