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मौजः बिना कार्यकारिणी भा रही अध्यक्षी

ग्वालियर में दोनों राजनैतिक दलों के जिला अध्यक्षों की मौज है। कोई रोक टोक नहीं और स्वयं के फैसले। दोनों ही जिलाध्यक्षों की ऐसी लाटरी लगी है कि बिना कार्यकारिणी के अध्यक्षी का सुख भोगा जा रहा है। पूरे शहर में जलवा खींचा है। छोटे से बड़े कार्यक्रम में पंजा दल और फूल दल के अध्यक्ष ही सुशोभित होते है। उनकी पूछपरख में चार चांद है। इधर कार्यकारिणी गठन के इंतजार में बैठे कार्यकर्ता उदास है। उनका कहना है कि बड़े नेताओं को कार्यकर्ताओं की याद सिर्फ चुनाव के समय आती है। वैसे भी ग्वालियर में अब में एकराज होने…

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ग्वालियर में दोनों राजनैतिक दलों के जिला अध्यक्षों की मौज है। कोई रोक टोक नहीं और स्वयं के फैसले। दोनों ही जिलाध्यक्षों की ऐसी लाटरी लगी है कि बिना कार्यकारिणी के अध्यक्षी का सुख भोगा जा रहा है। पूरे शहर में जलवा खींचा है। छोटे से बड़े कार्यक्रम में पंजा दल और फूल दल के अध्यक्ष ही सुशोभित होते है। उनकी पूछपरख में चार चांद है। इधर कार्यकारिणी गठन के इंतजार में बैठे कार्यकर्ता उदास है। उनका कहना है कि बड़े नेताओं को कार्यकर्ताओं की याद सिर्फ चुनाव के समय आती है। वैसे भी ग्वालियर में अब में एकराज होने से मूल भाजपाई किनारे लगा दिये गये है। परंतु दल का नेतृत्व कर रहे अध्यक्ष महोदयों को अपनी अध्यक्षी खूब भा रही है……

ग्वालियर में दोनों राजनैतिक दलों के जिला अध्यक्षों की मौज है। कोई रोक टोक नहीं और स्वयं के फैसले। दोनों ही जिलाध्यक्षों की ऐसी लाटरी लगी है कि बिना कार्यकारिणी के अध्यक्षी का सुख भोगा जा रहा है। पूरे शहर में जलवा खींचा है। छोटे से बड़े कार्यक्रम में पंजा दल और फूल दल के अध्यक्ष ही सुशोभित होते है। उनकी पूछपरख में चार चांद है। इधर कार्यकारिणी गठन के इंतजार में बैठे कार्यकर्ता उदास है। उनका कहना है कि बड़े नेताओं को कार्यकर्ताओं की याद सिर्फ चुनाव के समय आती है। वैसे भी ग्वालियर में अब में एकराज होने…

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