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बिजली मंत्री के निर्देशों की धज्जियां उड़ाते चावड़ी बाजार जोन के राजपूत साहब

अपने गृहनगर के बिजली मंत्री तोमर साहब की आजकल उनके ही विभाग के अधिकारी सुनने और मानने को तैयार नहीं है। मंत्री की अपेक्षा बिना तामझाम के उपभोक्ताओं की परेशानियों का हल आसानी से जल्द करने की है। लेकिन अधिकारियों की अपनी ढपली और अपना राग है। मतलब मंत्री की उपेक्षा जेब पर भारी है। पिछले दिनों मंत्री स्पष्ट कर चुके हैं कि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की कामकाज में परेशानी ना हों, परंतु अधिकारियों को ये पैटर्न पसंद नहीं। उन्हें तो उपभोक्ताओं को बेमतलब परेशान करने और कागजों में उलझाना रास आता है। साथ ही उपर से मलाई मिल…

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अपने गृहनगर के बिजली मंत्री तोमर साहब की आजकल उनके ही विभाग के अधिकारी सुनने और मानने को तैयार नहीं है। मंत्री की अपेक्षा बिना तामझाम के उपभोक्ताओं की परेशानियों का हल आसानी से जल्द करने की है। लेकिन अधिकारियों की अपनी ढपली और अपना राग है। मतलब मंत्री की उपेक्षा जेब पर भारी है।
पिछले दिनों मंत्री स्पष्ट कर चुके हैं कि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की कामकाज में परेशानी ना हों, परंतु अधिकारियों को ये पैटर्न पसंद नहीं। उन्हें तो उपभोक्ताओं को बेमतलब परेशान करने और कागजों में उलझाना रास आता है। साथ ही उपर से मलाई मिल जाये और क्या कहने। अब बात करें चावड़ी बाजार जोन की तो यहां भी उपभोक्ताओं को चक्कर लगवाना अधिकारियों का शौक बन गया है। कुर्सी पर विराजमान राजपूत साहब भी कुछ कम नहीं। वह बेमतलब आसान कम को जानबूझकर मुश्किल बताकर उपभोक्ताओं को परेशान क्यों करते है समझ से परे है। जबकि मंत्रीजी की माने तो बिजली विभाग उपभोक्ता फ्रेण्डली है और बिना कागजी तामझाम के झटपट काम होना उनकी प्राथमिकता है। परंतु राजपूत साहब को ये सब कहां समझ आता है वह तो कनेक्शन काटने जैसे मामूली काम को ही पथरीला बना देते है और उपभोक्ताओं को बेमतलब चक्कर लगवाते है। फिर चाहे कागज पूरे हों, लेकिन वह कुछ ना कुछ नुक्स निकालकर उपभोक्ता पर अपना अधिकारी राज थोपते है। है! भगवान अपने विभाग के मंत्री की ही जब अधिकारी नहीं सुनते आप ही सोचिये आम उपभोक्ता की क्या स्थिति है इस जंगलराज में…..

अपने गृहनगर के बिजली मंत्री तोमर साहब की आजकल उनके ही विभाग के अधिकारी सुनने और मानने को तैयार नहीं है। मंत्री की अपेक्षा बिना तामझाम के उपभोक्ताओं की परेशानियों का हल आसानी से जल्द करने की है। लेकिन अधिकारियों की अपनी ढपली और अपना राग है। मतलब मंत्री की उपेक्षा जेब पर भारी है। पिछले दिनों मंत्री स्पष्ट कर चुके हैं कि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की कामकाज में परेशानी ना हों, परंतु अधिकारियों को ये पैटर्न पसंद नहीं। उन्हें तो उपभोक्ताओं को बेमतलब परेशान करने और कागजों में उलझाना रास आता है। साथ ही उपर से मलाई मिल…

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