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स्व. राजकुमार बंसलः भास्करप्लस की मार्गदर्शक को आश्रुपूरित श्रद्धांजलि

कहते है प्रभु लीला चला चली का मेला है। बस यूं ही हमें रास्ते में छोड़कर हमारे मार्गदर्शक, गुरू, पालनहार परम श्रद्धेय राजकुमार बंसल जी भी जाने कहां चले गये। यह हम लोगों के लिए एक बज्रपात की तरह है। हमने सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी आपका साथ छूटेगा, पर प्रभु लीला के आगे हम लाचार साबित हो गये। भास्करप्लस डाट काम के मार्गदर्शक स्व. राजकुमार बंसल जी ने जब ये पौधा रोपा तो कहां किसी को पता था कि इसे पढ़ने वाले असीम होंगे। भास्करप्लस डाट काम को हमेशा अपने मार्गदर्शक की अगुवाई में रीडरों…

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कहते है प्रभु लीला चला चली का मेला है। बस यूं ही हमें रास्ते में छोड़कर हमारे मार्गदर्शक, गुरू, पालनहार परम श्रद्धेय राजकुमार बंसल जी भी जाने कहां चले गये। यह हम लोगों के लिए एक बज्रपात की तरह है। हमने सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी आपका साथ छूटेगा, पर प्रभु लीला के आगे हम लाचार साबित हो गये।
भास्करप्लस डाट काम के मार्गदर्शक स्व. राजकुमार बंसल जी ने जब ये पौधा रोपा तो कहां किसी को पता था कि इसे पढ़ने वाले असीम होंगे। भास्करप्लस डाट काम को हमेशा अपने मार्गदर्शक की अगुवाई में रीडरों का असीम स्नेह मिलता रहा है और आशा है आगे ओर भी ज्यादा मिलेगा। हमारे मार्गदर्शक ने हमेशा हमे सच्चाई के रास्ते पर चलने और सदा जनसेवा का संकल्प दिलाया है। आज भास्करप्लस डाट काम ने उसी रास्ते पर चलकर लोगों के बीच अपनी एक पहचान बनाई है। मार्गदर्शक की समय-समय पर उचित सलाह व आर्शीवाद भी मिलता रहा, परंतु अचानक ही उनका असमय हमारे बीच से चले जाना बड़ा कष्टदायी हम सबके लिए रहा है। इस समाचार के सुनते ही हम सबको गहरा आघात पहुंचा है। परंतु विधि के विधान का यही खेला है, जो आया है उसे जाना है। यही सच्चाई है, पर भास्करप्लस अपनी सेवा के लिए हमेशा तत्पर है और रहेगा। मार्गदर्शक के दिखाये मार्ग पर चलकर अब हमे उनके द्वारा खड़े किये गये इस प्रयास को ओर आगे ले जाना है। भास्करप्लस डाट काम की मार्गदर्शक परम श्रद्धेय स्व. राजकुमार बंसल जी को आश्रुपूरित श्रद्धांजलि। उनके श्रीचरणों में हम सभी का नमस्कार….. ॐ शांति

पुनः भास्करप्लस डाट काम परिवार कीे ओर से आश्रुपूरित श्रद्धांजलि… जयहिंद

कहते है प्रभु लीला चला चली का मेला है। बस यूं ही हमें रास्ते में छोड़कर हमारे मार्गदर्शक, गुरू, पालनहार परम श्रद्धेय राजकुमार बंसल जी भी जाने कहां चले गये। यह हम लोगों के लिए एक बज्रपात की तरह है। हमने सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी आपका साथ छूटेगा, पर प्रभु लीला के आगे हम लाचार साबित हो गये। भास्करप्लस डाट काम के मार्गदर्शक स्व. राजकुमार बंसल जी ने जब ये पौधा रोपा तो कहां किसी को पता था कि इसे पढ़ने वाले असीम होंगे। भास्करप्लस डाट काम को हमेशा अपने मार्गदर्शक की अगुवाई में रीडरों…

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