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कोरोना काल के बाद के पहले बजट ने व्यापार-उद्योग जगत को किया निराश: भूपेन्द्र जैन

* आयकर स्लैव में बदलाव न कराना निराश, चुनावी राज्यों की चिन्ता में मप्र को भुलाया ग्वालियर। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के मध्यप्रदेश के अध्यक्ष भूपेन्द्र जैन ने कोरोनाकाल के बाद के पहले आम बजट को छोटे, मझोले व बड़े कारोबारियों के लिए निराशाजनक करार देते हुए कहा है कि सामान्य, मध्यम एवं गरीब तबके के लिए भी बजट में कोई आशाप्रद प्रावधान नहीं है, जबकि व्यापारियों एवं आम जनता ने इस बजट से काफी उम्मीदें लगा रखी थीं। कैट सहित विभिन्न व्यापारी व उद्यमी संगठनों ने बजट पूर्व जो सुझाव दिए थे, उन्हें भी नजरंदाज किया गया…

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* आयकर स्लैव में बदलाव न कराना निराश, चुनावी राज्यों की चिन्ता में मप्र को भुलाया
ग्वालियर। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के मध्यप्रदेश के अध्यक्ष भूपेन्द्र जैन ने कोरोनाकाल के बाद के पहले आम बजट को छोटे, मझोले व बड़े कारोबारियों के लिए निराशाजनक करार देते हुए कहा है कि सामान्य, मध्यम एवं गरीब तबके के लिए भी बजट में कोई आशाप्रद प्रावधान नहीं है, जबकि व्यापारियों एवं आम जनता ने इस बजट से काफी उम्मीदें लगा रखी थीं। कैट सहित विभिन्न व्यापारी व उद्यमी संगठनों ने बजट पूर्व जो सुझाव दिए थे, उन्हें भी नजरंदाज किया गया है। राज्यवार देखें तो बजट में मप्र को कोई सौगात या रियायत नहीं ली है। यह चुनावी बजट है, यह इस बात से जाहिर होता है कि इस वर्ष जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं, उनके लिए ही पिटारा खोला गया है। मप्र के उद्योगपति एवं व्यापारी बजट से निराश हैं। एक ओर बजट में डिजीटल को कोई बढ़ावा नहीं दिया गया है वहीं बैंक से नगदी निकालने पर अतिरिक्त करारोपण भी कर दिया है।
कैट के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र जैन ने वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा आज प्रस्तुत बजट के प्रावधानों का विश्लेषण करते हुए कहा कि एमएसएमई में डिजीटल पेमेंट को प्रोत्साहित करने के लिए 1500 करोड़ रखे गए हैं, इसी प्रकार छोटे मझोले लघु उद्योगों को राहत देने के लिए 15 हजार 700 करोड़ दिए गए हैं लेकिन कोरोना काल में त्रासद झंझावात झेलने वाले लघु मध्यम उद्योगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने के लिहाज से यह धनराशि काफी कम है। यह धनराशि बढ़ाई जानी थी। भूपेन्द्र जैन ने इनकम टैक्स के स्लैब में कोई बदलाव न किए जाने पर क्षोभ जताते हुए कहा कि यह कोरोना काल में अपने उद्योग-धंधे ठप एवं नौकरियां गंवा चुके मध्यम व निम्नमध्यम वर्ग की आशाओं पर तुषारापात है। श्री जैन ने देश की आजादी के आगामी वर्श 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 75 वर्ष एवं इससे अधिक उम्र के सीनियर सिटीजन्स को इनकम टैक्स रिटर्न भरने से छूट दिए जाने का स्वागत किया लेकिन यह भी कहा कि इससे बुजुर्गों को कोई राहत नहीं मिलने वाली, क्योंकि उनकी बैंक में जमा धनराशि व पेंशन आदि में से आयकर की कटौती जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि बजट में जनता के शारीरिक स्वास्थ्य का तो ध्यान रखा गया है लेकिन देश के आर्थिक स्वास्थ्य को नजरंदाज किया गया है। उन्होंने कोरोना टीकाकरण के लिए 35 हजार करोड़ एवं स्वास्थ्य के लिए 64 हजार करोड़ के प्रावधान का स्वागत करते हुए कहा कि उद्योग धंधों व व्यापार जगत की सेहत दुरूस्त करने के लिए भी एैसे ही प्रावधान किए जाने थे।
उन्होंने कहा कि जीएसटी के प्रावधानों में अभी हाल ही में जो संशोधन किए गए थे, वे काफी खतरनाक थे। बजट पूर्व चर्चाओं में कैट सहित देश के सभी व्यापारी संगठनों ने इन उलझाउ एवं अप्रासंगिक नवीन जीएसटी प्रावधानों को वापस लेने की मांग की थी लेकिन बजट में एैसी कोई राहत नहीं बख्शी गई है। एमएसपी को डेढ़ गुना किया जाना स्वागतयोग्य है लेकिन कृषि, व्यापार जगत एवं मध्यम वर्ग को और अधिक रियायतों की उम्मीद थी। केट अध्यक्ष ने इलेक्टानिक्स सामान, मोबाइल, ऑटो पार्टंस महंगे किए जाने पर चिन्ता जताते हुए कहा कि देश के आर्थिक विकास के लिहाज से यह ठीक नहीं है। हालांकि श्री जैन ने लोहा, स्टील, नाइलोन-पॉलिस्टिर के कपड़े सस्ते होने एवं सोना-चांदी व कॉपर पर डयूटी घटाने का स्वागत किया। उन्होंने पेट्रोल पर अतिरिक्त कर लगाने का विरोध करते हुए कहा कि पहले से ही पेट्रोल के दाम बढ़े हुए थे अब और ज्यादा बढ़ जाएंगे।

* आयकर स्लैव में बदलाव न कराना निराश, चुनावी राज्यों की चिन्ता में मप्र को भुलाया ग्वालियर। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के मध्यप्रदेश के अध्यक्ष भूपेन्द्र जैन ने कोरोनाकाल के बाद के पहले आम बजट को छोटे, मझोले व बड़े कारोबारियों के लिए निराशाजनक करार देते हुए कहा है कि सामान्य, मध्यम एवं गरीब तबके के लिए भी बजट में कोई आशाप्रद प्रावधान नहीं है, जबकि व्यापारियों एवं आम जनता ने इस बजट से काफी उम्मीदें लगा रखी थीं। कैट सहित विभिन्न व्यापारी व उद्यमी संगठनों ने बजट पूर्व जो सुझाव दिए थे, उन्हें भी नजरंदाज किया गया…

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