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गोडसे के वंशज अमरीका में

कलियुग के महान जन नेता महात्मा गाँधी कभी अमेरिका नहीं गए लेकिन उनकी कीर्ति अमेरिका में अवश्य पहुंची और लगभग हर शहर में उनके उपासक मौजूद हैं और इसके साथ ही गांधी के विरोधी भी. अमेरिका में अदृश्य गांधी विरोधियों ने पिछले दिनों केलिफोर्निया के पास डेविस शहर में महात्मा गांधी की कांस्य प्रतिमा को खंडित कर दिया .दुर्भाग्य ये कि स्थानीय गांधीवादी इस हादसे के खिलाफ सड़कों पर नजर नहीं आये . मैंने सबसे पहले महात्मा गांधी की प्रतिमा अमेरिका में अश्वेतों की राजधानी अटलांटा में कई वर्ष पहले देखी थी. महात्मा गांधी से प्रेरित अमेरिका के गांधी जूनियर…

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कलियुग के महान जन नेता महात्मा गाँधी कभी अमेरिका नहीं गए लेकिन उनकी कीर्ति अमेरिका में अवश्य पहुंची और लगभग हर शहर में उनके उपासक मौजूद हैं और इसके साथ ही गांधी के विरोधी भी. अमेरिका में अदृश्य गांधी विरोधियों ने पिछले दिनों केलिफोर्निया के पास डेविस शहर में महात्मा गांधी की कांस्य प्रतिमा को खंडित कर दिया .दुर्भाग्य ये कि स्थानीय गांधीवादी इस हादसे के खिलाफ सड़कों पर नजर नहीं आये .
मैंने सबसे पहले महात्मा गांधी की प्रतिमा अमेरिका में अश्वेतों की राजधानी अटलांटा में कई वर्ष पहले देखी थी. महात्मा गांधी से प्रेरित अमेरिका के गांधी जूनियर मार्टिन लूथर किंग के स्मारक में लगी थी .मार्टिन ने गांधी के सत्याग्रह से प्रेरित होकर अमेरिका में रंगभेद के खिलाफ निर्णायक आंदोलन किया था .उनकी हत्या भी महात्मा गांधी की ही तरह 4 अप्रेल 1968 को गोली मारकर कर दी गयी थी ,लेकिन अमेरिका में नाथूराम गोडसे के वंशज न मार्टिन लूथर किंग जूनियर की यादों को मिटा पाए और न महात्मा गांधी की यादों को. वे गांधी और मार्टिन की विचारधारा से लड़ने के बजाय उनकी प्रतिमाओं से जूझ रहे हैं .
मेरे अमेरिका पहुँचने से एक दिन पहले ही उत्तरी केलिफोर्निया के शहर डेविस के सेंट्रल सिटी पार्क में गोडसे के स्थानीय वंशजों ने महात्मा गांधी की आदमकद कांस्य प्रतिमा को खंडित कर दिया .२९४ किलोग्राम वजन और छह फिट ऊंची इस प्रतिमा से लड़ने वाले कायर थे .सभी हमलावर नकाब में थे,वे ए और गांधी के बूत पर अपना गुस्सा निकालकर चलते बने .स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी.लेकिन इस हादसे से अमेरिका में रहने वाले भारतीय ही नहीं पूरी दुनिया के गांधीवादियों की भावनाएं आहत हुईं.सबने इसी घृणास्पद अपराध बताया और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
गोडसे के अमरीकी संस्करण ने गांधी पर अपना नजला क्यों झाड़ा ये कोई नहीं जानता .स्थानीय पुलिस ने इस हादसे को हालाँकि गंभीरता से लिया लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई. आपको बता दें की महात्मा गाँधी की ये प्रतिमा भारत सरकार ने डेविस शहर को उपहार में दी थी. चार साल पहले जब गांधी जी की ये प्रतिमा यहां लगाईं गयी थी उस समय भी गोडसे के वंशजों ने इसका विरोध किया था .इस प्रतिमा को हटाने की मांग करने वाले भी वे अल्पसंख्यक थे जो भारतीय मूल के हैं .इस हादसे के बारे में अंतर्राष्ट्रीय भारतीय मैत्री संघ के गौरांग देसाई ने निंदा की और बताया की इसके पीछे कुछ हिंदुत्ववादी और खालिस्तान समर्थक संगठन हैं ये तत्व ही भारतीय प्रतीकों के खिलाफ काम करते हैं और हिंदुत्व का हौवा खड़ा कर रहे हैं .
आपको बता दें की गांधी और धर्मनिरपेक्षता विरोधी तत्वों ने पहले भी यहां घृणा फ़ैलाने का प्रयास किया स्थानीय स्कूलों के पाठ्यक्रमों इ भारत से जुड़े विषय पाठ्यक्रमों से निकलवाने का प्रयास किया लेकिन नाकाम रहे .अमेरका के हिन्दू-अमेरिकन फाउंडेशन ने इस हादसे की घोर निंदा करते हुए कार्रवाई की मांग की पिछले साल दिसंबर में भी खालिस्तान समर्थकों ने वाशिंगटन में महत्मा गांधी की प्रतिमा को निशाना बनाया था ये प्रतिमा भारतीय दूतावास के बाहर लगी थी. .कहने का असहय ये है की महत्मा गांधी दुनिया में जहाँ-जहाँ हैं,गोडसे के वंशज वहां-वहां हैं .और ये रहेंगे. घृणा इनका धर्म है फिर चाहे भारत हो या अमेरिका .अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन इसी घृणा को प्रेम में बदलने का अभियान चला रहे हैं .अमेरिका में घृणा फ़ैलाने वालों को हाल ही में हुए चुनावों में स्थानीय जनता ने नकार दिया है .उम्मीद है कि आने वाले दिनों में ये तत्व अपने दड़वों में वापस लौट जायेंगे .यहां गांधी का विरोध अमेरिका वाले नहीं करते बल्कि वे लोग करते हैं जिनकी जड़ें भारत में ही हैं .
@ राकेश अचल

कलियुग के महान जन नेता महात्मा गाँधी कभी अमेरिका नहीं गए लेकिन उनकी कीर्ति अमेरिका में अवश्य पहुंची और लगभग हर शहर में उनके उपासक मौजूद हैं और इसके साथ ही गांधी के विरोधी भी. अमेरिका में अदृश्य गांधी विरोधियों ने पिछले दिनों केलिफोर्निया के पास डेविस शहर में महात्मा गांधी की कांस्य प्रतिमा को खंडित कर दिया .दुर्भाग्य ये कि स्थानीय गांधीवादी इस हादसे के खिलाफ सड़कों पर नजर नहीं आये . मैंने सबसे पहले महात्मा गांधी की प्रतिमा अमेरिका में अश्वेतों की राजधानी अटलांटा में कई वर्ष पहले देखी थी. महात्मा गांधी से प्रेरित अमेरिका के गांधी जूनियर…

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