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वाह! टाउनहाॅल कायाकल्प पर करोड़ों खर्च और गिरने लगी सीलिंग

ग्वालियर। ह्रदय स्थल महाराज बाड़े पर ऐतिहासिक इमारत टाउनहाॅल है। नगर निगम और स्मार्ट सिटी ने एक करोड़ खर्च कर कायाकल्प किया है। इसका लोकार्पण पेंडिंग है, लेकिन लोकार्पण से पहले ही सीलिंग गिरने लगी है। इससे गुणवत्ता पर सवालियां निशान लग गया है और घालमेल की भी बू आ रही है। रियासत काल में राजा महाराजाओं और आमजन के मनोरंजन का स्थल नाटक घर और आजादी के बाद बनी रीगल टाॅकीज आज महाराज बाड़े पर टाउन हाॅल के रूप में है। वर्ष 2012 में इसका कायाकल्प करने का जिम्मा नगर निगम ने उठाया था। इसमें आकर्षक कुर्सियां, एयर कंडीशन…

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ग्वालियर। ह्रदय स्थल महाराज बाड़े पर ऐतिहासिक इमारत टाउनहाॅल है। नगर निगम और स्मार्ट सिटी ने एक करोड़ खर्च कर कायाकल्प किया है। इसका लोकार्पण पेंडिंग है, लेकिन लोकार्पण से पहले ही सीलिंग गिरने लगी है। इससे गुणवत्ता पर सवालियां निशान लग गया है और घालमेल की भी बू आ रही है।
रियासत काल में राजा महाराजाओं और आमजन के मनोरंजन का स्थल नाटक घर और आजादी के बाद बनी रीगल टाॅकीज आज महाराज बाड़े पर टाउन हाॅल के रूप में है। वर्ष 2012 में इसका कायाकल्प करने का जिम्मा नगर निगम ने उठाया था। इसमें आकर्षक कुर्सियां, एयर कंडीशन और विद्युत पर 70 लाख खर्च किये गये थे। वर्ष 2018 में इस इमारत के हेरीटेज में शामिल होने के बाद नगर निगम ने इसे स्मार्ट सिटी कारपोरेशन के हवाले कर दिया। स्मार्ट सिटी द्वारा 80 लाख खर्च कर कायाकल्प किया जा रहा है। लेकिन विरासत में मिली इस इमारत का लोकार्पण होने से पहले ही सीलिंग नीचे टपकने लगी है। इससे स्मार्ट सिटी के कार्यों की गुणवत्ता पर सवालियां निशान लग गया है।

ग्वालियर। ह्रदय स्थल महाराज बाड़े पर ऐतिहासिक इमारत टाउनहाॅल है। नगर निगम और स्मार्ट सिटी ने एक करोड़ खर्च कर कायाकल्प किया है। इसका लोकार्पण पेंडिंग है, लेकिन लोकार्पण से पहले ही सीलिंग गिरने लगी है। इससे गुणवत्ता पर सवालियां निशान लग गया है और घालमेल की भी बू आ रही है। रियासत काल में राजा महाराजाओं और आमजन के मनोरंजन का स्थल नाटक घर और आजादी के बाद बनी रीगल टाॅकीज आज महाराज बाड़े पर टाउन हाॅल के रूप में है। वर्ष 2012 में इसका कायाकल्प करने का जिम्मा नगर निगम ने उठाया था। इसमें आकर्षक कुर्सियां, एयर कंडीशन…

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