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12 जून जन्मदिन विशेष: कार्यकर्ता भाव वाले,अद्धभुत अटल नेता नरेंद्र सिंह तोमर

(धीरज बंसल) मोदी सरकार के सर्वश्रेष्ठ समकालीन मंत्रियों में एक नरेंद्र सिंह तोमर का राजनीतिक वैशिष्ट्य केवल देश के सफलतम ग्रामीण विकास या कृषि मंत्री के रूप में ही नही है। वे भारत में लोकतंत्र की असल ताकत के जीवंत प्रतीक भी है।70 साल की गणतन्त्रीय विरासत को आम गण की भागीदारी के नजरिये से समझा जाएगा तो नरेंद्र सिंह तोमर जैसी शख्सियतों की जीवनयात्राओं को रेखांकित किये बिना यह विश्लेषण पूरा नही होगा।असल में नरेंद्र सिंह तोमर नैराश्य से भरे भारत के संसदीय जीवन में भरोसे और मजबूती के प्रतिनिधि भी है।संघर्ष,समर्पण,अनुशासन और ध्येयनिष्ठा का एक परिणामोन्मुखी गौरव का…

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(धीरज बंसल)

मोदी सरकार के सर्वश्रेष्ठ समकालीन मंत्रियों में एक नरेंद्र सिंह तोमर का राजनीतिक वैशिष्ट्य केवल देश के सफलतम ग्रामीण विकास या कृषि मंत्री के रूप में ही नही है। वे भारत में लोकतंत्र की असल ताकत के जीवंत प्रतीक भी है।70 साल की गणतन्त्रीय विरासत को आम गण की भागीदारी के नजरिये से समझा जाएगा तो नरेंद्र सिंह तोमर जैसी शख्सियतों की जीवनयात्राओं को रेखांकित किये बिना यह विश्लेषण पूरा नही होगा।असल में नरेंद्र सिंह तोमर नैराश्य से भरे भारत के
संसदीय जीवन में भरोसे और मजबूती के प्रतिनिधि भी है।संघर्ष,समर्पण,अनुशासन और ध्येयनिष्ठा का एक परिणामोन्मुखी गौरव का नाम भी उन्हें दिया जा सकता है।वे उन करोडों नागरिकों के बीच भरोसे का भाव जागृत करते है जिनकी अपनी कोई निजी सम्रद्ध वंश परम्परा नही रही है।लेकिन अपने पुरुषार्थ से जिन्होंने लोकजीवन में अनुकरणीय मिसालें स्थापित की है।
देश के नीति निर्माण में नरेंद्र सिंह तोमर की प्रमुख भागीदारी इस गौरवमयी और अनुकरणीय सन्देश को भी समाज जीवन मे प्रतिस्थापित करती है कि सियासत केवल धूर्तता, बेईमानी,अंध प्रतिस्पर्धा, और धनी मानी पृष्ठभूमि से ही निर्धारित नही होती है।बल्कि ईमानदारी और अनुशासन ही इसका शाश्वत पथ है।ग्वालियर की धरती ने भारत की संसदीय परम्परा को नायाब नगीने दिये है अटल जी,माधवराव सिंधिया ,राजमाता सिंधिया की महान ,संसदीय परम्परा को नरेंद्र सिंह तोमर ने जिस खूबसूरती और विशिष्टता के साथ आगे बढ़ाया है वह सबके लिए गौरवान्वित करने वाला लोक विमर्श भी है।इसे इस अर्थ में भी समझने की जरूरत है कि कैसे एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार का युवा अपने ध्येय के लिए समर्पित भाव से आगे बढ़ता है और यह संसदीय व्यवस्था कैसे इसे अपने आँचल से संपुष्ट करते हुए देश के सियासी नवरत्नों में स्थापित कर देती है।सिर्फ़ सत्ता के लिए सियासत का वरण करने वाले नए लोगों के लिए नरेंद्र सिंह तोमर एक रोल मॉडल भी है।लेकिन इस मॉडल में कोई शॉर्ट कट नही है, एक पूरी साधना है एक अनुशासन है, एक वैचारिक अधिष्ठान है और इन सबके साथ सयंम एवं संतुलन का एक अति विशिष्ट समावेश भी।
नरेंद्र सिंह तोमर होने का मतलब अपने आप मे एक संगठन शास्त्र भी है। जो यह बुनियादी सीख देता है कि यह जीवन केवल सत्ता के लिए नही बल्कि समाज के लिए भी समानन्तर रूप से उपयोगी है।जब आप समाज के लिए अपने संगठन के माध्यम से स्वयं को समर्पित कर देते है तब यह समाज और सन्गठन व्यवस्था खुद आपको नरेंद्र सिंह तोमर बना देती है।
बाल्मीकि रामायण में राम का वैशिष्ट्य रेखांकित करते हुए लिखा गया है कि राम असंभवो में समन्वय है।नरेंद्र सिंह राम के इसी सन्देश को पकड़कर चलने वाले अद्धभुत सियासी चरित्र है।वे कद में जितने छोटे है,संभाषण में जितने मितभाषी है कमोबेश पराक्रम और पुरुषार्थ में उतने ही प्रबल है।वे असंभवो में समन्वय के समुच्चय है ।वे सहिष्णुता के अधिष्ठाता है।मप्र की सियासत में वे अकेले ऐसे नेता है जिनका कोई राजनीतिक शत्रु नही है।यही उनकी समन्वयक की असली निशानी है।यही उनका मौलिक वैशिष्ट्य है जो उन्हें अद्धभुत बनाता है।यहीं एक मात्र कारण है कि दिल्ली दरबार में एक से एक एकेडेमिक्स पृष्ठभूमि वाले नेताओं के इतर दुनिया के सबसे लोकप्रिय और ताकतवर नेताओं में एक नरेंद्र मोदी को ग्वालियर के आर्यनगर की तंग गली से आया यह शख्स पसन्द आता है।हर कठिन टास्क को बगैर तनाव और शोर शराबे के अंजाम तक पहुचाने की निष्णात विद्या में नरेंद्र सिंह के आगे कोई नही टिकता है फिर चाहे मामला कृषि और ग्रामीण विकास को नया जनोन्मुखी चेहरा देना हो या सियासी कूटनीतिक ऑपरेशन।हर मोर्चे पर नरेंद्र सिंह ने खुद को प्रमाणित किया है।वे पार्टी के ऐसे नेता है जो हर काम को आज भी कार्यकर्ता भाव के साथ करते है।जरा सोचिये नरेंद्र सिंह आज जिस ताकतवर मुकाम पर है वहाँ होकर कोई अहंकार और गलतफहमी का शिकार क्यों न हो?लेकिन नरेंद्र सिंह अगर इस सबसे से अछूते है तो इसके पीछे उनकी मजबूत वैचारिकी और जड़ों से जुड़ाव ही है।
वैचारिक दृढ़ता ही उन्हें कार्यकर्ता भाव को खुद के विराट हो चुके व्यक्तित्व से ओझल नही होने देती है पिछले चार विधानसभा चुनावों में लोगों ने उन्हें पार्टी के संकटमोचक की भूमिका में देखा।2008 और 2013 में उनके संगठन कौशल की मिसाल आज देश भर में नजीर के तौर पर दी जाती है।मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह कहना कि “हम दो जिस्म एक जान है”.असल में सत्ता और संगठन के समन्वय का एक अद्वितीय दर्शन ही है।यह साम्य ठीक वैसा ही जैसा मोदी जी और अमित शाह में चुनावी अभियानों में दिखता रहा है।यानी सत्ता और सन्गठन दोनों के लिए नरेंद्र तोमर ने एक नया व्याकरण रचा जिसे आज की उनकी मौजूदा पोजीशन के निर्धारक तत्व के रूप में समझने की भी आवश्यकता है।
हर छोटे बड़े चुनाव में उनकी भूमिका को भी बारीकी से समझने की आवश्यकता है।
22 -22 घण्टे वह टिकटार्थीयों के उन्मादी समर्थकों के साथ शांत भाव से मुकाबिल होकर उन्हे पार्टी कार्य मे जुटा देते है।
पुनश्च:नरेन्द्र सिंह डायबिटिक है लेकिन पिछले 30 सालों से उन्हें किसी ने गुस्साते या झुंझलाते हुए नही देखा है।
नई पीढ़ी के बीजेपी कार्यकर्ताओं को आज उनके जन्मदिन पर उनसे बहुत कुछ सीखने का अवसर है।

(धीरज बंसल) मोदी सरकार के सर्वश्रेष्ठ समकालीन मंत्रियों में एक नरेंद्र सिंह तोमर का राजनीतिक वैशिष्ट्य केवल देश के सफलतम ग्रामीण विकास या कृषि मंत्री के रूप में ही नही है। वे भारत में लोकतंत्र की असल ताकत के जीवंत प्रतीक भी है।70 साल की गणतन्त्रीय विरासत को आम गण की भागीदारी के नजरिये से समझा जाएगा तो नरेंद्र सिंह तोमर जैसी शख्सियतों की जीवनयात्राओं को रेखांकित किये बिना यह विश्लेषण पूरा नही होगा।असल में नरेंद्र सिंह तोमर नैराश्य से भरे भारत के संसदीय जीवन में भरोसे और मजबूती के प्रतिनिधि भी है।संघर्ष,समर्पण,अनुशासन और ध्येयनिष्ठा का एक परिणामोन्मुखी गौरव का…

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