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लापता IAS 17 साल बाद लौटे, नौकरी पर दावा पेश किया

नई दिल्ली। 1984 बैच के बर्खास्त आइएएस अधिकारी राजेश कुमार सिंह 17 साल बाद लौटकर आए हैं और नौकरी पर दावा कर रहे हैं। पांच साल से भी ज्यादा समय तक अनुपस्थित रहने के कारण 2003 में जब उन्हें बर्खास्त किया गया था तो वह अमेरिका में थे। वह 1996 में अध्ययन अवकाश पर अमेरिका गए थे और फिर नहीं लौटे। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका की आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट में प्रोफेसर राजेश कुमार सिंह ने नौकरी पर दावा करते हुए प्रधानमंत्री के समक्ष भी प्रेजेंटेशन दिया और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) भी गए। उनका कहना है कि उन्हें…

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नई दिल्ली। 1984 बैच के बर्खास्त आइएएस अधिकारी राजेश कुमार सिंह 17 साल बाद लौटकर आए हैं और नौकरी पर दावा कर रहे हैं। पांच साल से भी ज्यादा समय तक अनुपस्थित रहने के कारण 2003 में जब उन्हें बर्खास्त किया गया था तो वह अमेरिका में थे। वह 1996 में अध्ययन अवकाश पर अमेरिका गए थे और फिर नहीं लौटे।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका की आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट में प्रोफेसर राजेश कुमार सिंह ने नौकरी पर दावा करते हुए प्रधानमंत्री के समक्ष भी प्रेजेंटेशन दिया और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) भी गए। उनका कहना है कि उन्हें नौकरी से गलत तरीके से बर्खास्त किया गया है। प्रधानमंत्री ने उनका प्रजेंटेशन खारिज कर दिया जबकि कैट ने भी पिछले महीने उनकी याचिका खारिज कर दी।

कैट ने पहले ही खारिज कर दिया था

कैट ने कहा था कि यह सिर्फ अकल्पनीय है। ऐसे अधिकारी के शामिल होने से एटीएम से पैसे की निकासी हो सकती है। यहां तक कि जब प्रशासन का सबसे कम कर्मचारी कुछ महीनों के लिए छुट्टी पर जाते हैं तो उनकी पुन: ज्वाइनिंग कई जरूरतों को पूरा करने पर सशर्त होती है।
राजेश कुमार ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से 1981 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन और 1983 में आइआइटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। 1984 में वह आइएएस अधिकारी बने थे। उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित किया गया था। 10 जुलाई, 2002 को सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। 28 सितंबर, 2002 को उनके खिलाफ एक और नोटिस जारी किया गया था। जिसके जवाब में उन्होंने 31 अक्टूबर, 2002 को हिंदी में एक हाथ से पत्र लिखा, जिसमें दावा किया कि 18 जुलाई 2001 को छुट्टी का आवेदन प्रस्तुत करने से पहले वह 17 जुलाई, 2001 को सेवा में शामिल हो गए थे और तत्कालीन मुख्य सचिव राकेश शर्मा से मिले थे और छुट्टी के विस्तार के लिए आवेदन किया था। यह उनसे आखिरी संवाद था। उत्तराखंड सरकार ने जांच शुरू की क्योंकि सिंह ने दावा किया कि उन्होंने शर्मा को ड्यूटी करने की सूचना दी थी।
सरकार ने 31 दिसंबर, 2002 को एक पत्र के माध्यम से शर्मा के साथ जांच की। शर्मा ने 7 मार्च, 2003 को जवाब दिया कि वह जिस हद तक याद कर सकते हैं कि सिंह ने 18 जुलाई, 2001 से 31 दिसंबर, 2001 तक अर्जित अवकाश की मंजूरी के लिए 17 जुलाई, 2001 को उनसे मुलाकात की थी। शर्मा ने कहा कि उन्हें सिंह के शामिल होने और रिकॉर्ड की जांच का सुझाव नहीं दिया था। रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद, सरकार ने पाया कि सिंह 17 जुलाई 2001 को सेवा में शामिल नहीं हुए थे। राष्ट्रपति ने आरके सिंह की सेवा से इस्तीफा को मान लिया। भारतीय प्रशासनिक सेवा, उत्तरांचल कैडर (1984), अखिल भारतीय (सेवा) नियम, 1955 के नियम 7 (2) के तहत तत्काल प्रभाव से,19 मई, 2003 की अधिसूचना जारी की गई।

बीच के सालों के बारे में किसी को नहीं पता

दो साल पहले रिटायर हो गए उनके एक बैचमेट ने बताया, ‘सिंह तेज, मुखर और नए तरीकों को अपनाने वाले थे। किसी को नहीं पता कि वह इतने साल कहां रहे।’ जब राजेश कुमार सिंह की वकील अनामिका से संपर्क किया गया तो उन्होंने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया। वहीं, राजेश कुमार से पूछा गया कि क्या वह ऊंची अदालत में अपील दायर करेंगे या नहीं तो उन्होंने कोई भी जवाब देने से इन्कार कर दिया।

नई दिल्ली। 1984 बैच के बर्खास्त आइएएस अधिकारी राजेश कुमार सिंह 17 साल बाद लौटकर आए हैं और नौकरी पर दावा कर रहे हैं। पांच साल से भी ज्यादा समय तक अनुपस्थित रहने के कारण 2003 में जब उन्हें बर्खास्त किया गया था तो वह अमेरिका में थे। वह 1996 में अध्ययन अवकाश पर अमेरिका गए थे और फिर नहीं लौटे। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका की आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट में प्रोफेसर राजेश कुमार सिंह ने नौकरी पर दावा करते हुए प्रधानमंत्री के समक्ष भी प्रेजेंटेशन दिया और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) भी गए। उनका कहना है कि उन्हें…

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